दिल्ली हाईकोर्ट पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) संगठन पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ के खिलाफ दायर याचिका पर 14 जुलाई को सुनवाई करेगा. मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ मामले में सुनवाई कर रही है. कोर्ट14 जुलाई को इस बात को लेकर सुनवाई करेगा कि याचिका सुनवाई योग्य है या नही.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकककर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि मामला 14 बार लिस्ट हो चुका है अभी तक औपचारिक नोटिस भी जारी नहीं किया गया है. उन्होंने कहा, मैं बस इतना चाहता हूं कि मेरे मामले में फैसला सुनाया जाए. युएपीए के तहत कार्यपालिका द्वारा प्रतिबंध का आदेश पारित किया गया था. इसे यूएपीए ट्रिब्यूनल द्वारा पुष्टि की गई.
UAPA के तहत प्रतिबंध की वैधानिकता को दी गई चुनौती
वकील ने यह भी कहा कि मैंने न्यायिक समीक्षा दायर की है. वही केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य नही है यह ट्रिब्यूनल के खिलाफ 226वीं याचिका है. जिसमें एक मौजूदा हाई कोर्ट जज शामिल है. इसलिए नोटिस जारी नही किया गया है.
याचिकाकर्ता के कहने पर नोटिस जारी नही किया जा सकता. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायाधिकरण अंततः एक वैधानिक न्यायाधिकरण हैं, इसमें एक मौजूदा हाई कोर्ट के जज शामिल हो सकते है. लेकिन यह अंततः एक न्यायाधिकरण है. कोर्ट ने पूछा कि क्या यह रिट अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आता है. दायर याचिका में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) न्यायाधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा संगठन पर लगाए गए पांच साल के प्रतिबंध की पुष्टि की गई है.
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि न्यायाधिकरण ने जिन तथ्यों एवं सबूतों पर विचार करने के बाद आदेश पारित किया वह कानून के ज्ञात सिद्धांतों के विपरीत था. उन्होंने यह भी दावा किया गया सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता द्वारा बचाव के लिए उठाए गए तथ्यों पर कोई निष्कर्ष नहीं निकला. सितंबर 2022 में गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर पीएफआई और उसके सहयोगी संगठनों को गैरकानूनी घोषित किया था.
-भारत एक्सप्रेस
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