दिल्ली हाईकोर्ट ने काउंसिलिंग के लिए कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) के पीजी अभ्यर्थियों से कंसोर्टयिम ऑफ नेशनल लॉ यूनिर्वसटिीज (एनएलयूएस) की ओर से 50 हजार से ज्यादा फीस लेने को चुनौती देने के मामले में एनएलयूएस सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता ने इस मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई), विश्विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) व केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. कोर्ट 2 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.
याचिकाकर्ता ने उठाए फीस पर सवाल
कोर्ट ने इस मामले में फिलहाल अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि काउंसिलिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और एक उम्मीदवार के लिए पूरी प्रक्रिया को बाधित नहीं किया जा सकता है. याचिकाकर्ता जतिन श्रीवास्तव ने कहा है कि यह फीस बहुत ज्यादा है.
उन्होंने कहा है कि बिना कोई आधार के मनमानी फीस वसूली जा रही है. इसे काफी कम होनी चाहिए. उसने परीक्षा में 474 रैंक हासिल की है. उसे काउंसिलिंग प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पहले 30 हजार रुपए जमा करना होगा और उसके बाद काउंसलिंग के प्रत्येक दौर में भाग लेने के लिए 20 हजार रुपए अनिवार्य रूप से देना होगा.
कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से किया इनकार
इसके अलावा सीट कंफर्म करने के लिए भी उतनी ही राशि देना होगा, जिसे वापस नहीं किया जाएगा. इस तरह से वह जितना बार सीट कंफर्म करना चाहेगा तो उसे 20-20 हजार रुपए देने होंगे. जबकि काउंसिलिंग तीन बार होना है. यह यूजीसी नियमों और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है. साथ ही पूरे देश में यह एकमात्र परीक्षा है, जिसमें इतनी बड़ी राशि का शुल्क लिया जाता है. इससे सैकड़ों छात्र भाग नहीं ले पा रहे हैं.
याचिका में कहा गया है कि इतनी अधिक फीस लेने के बारे में कभी सुना नहीं है. इसका उस उद्देश्य और लक्ष्य से कोई संबंध नहीं है, जिसके लिए काउंसलिंग आयोजित की जा रही है. इतनी अधिक फीस वसूलना न केवल भेदभावपूर्ण और असंगत है, बल्कि उन लोगों के लिए भी परेशानी पैदा करने वाला है जिनकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है.
ये भी पढ़ें: बटला हाउस अतिक्रमण मामला, दिल्ली हाईकोर्ट ने डीडीए को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


