दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट स्कूलों में बम की धमकी जैसी आकस्मिक स्थितियों से निपटने के लिए एक व्यापक तंत्र तैयार करने में विफल रहने पर दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव एवं दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
जस्टिस अनीश दयाल ने इसे एक गंभीर मुद्दा बताया और कहा कि इस पर प्राधिकारियों को इसपर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है. विशेषकर तब जब फर्जी कॉल आना बहुत आम बात हो गई है और इससे बच्चे, उनके अभिभावक एवं स्कूल वाले परेशान हो रहे हैं.
कोर्ट के आदेश की अवमानना का दावा
कोर्ट ने इस मामले में बृहस्पतिवार को प्राधिकार से अद्यतन जानकारी मांगी और सुनवाई 19 मई के लिए स्थगित कर दी. साथ ही सरकार और पुलिस अधिकारियों को उपस्थित रहने के लिए कहा. याचिकाकर्ता अधिवक्ता अर्पित भार्गव ने याचिका में स्कूलों को बार-बार बम धमकी वाले ई-मेल मिलने को लेकर दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस की निष्क्रियता और लापरवाही का आरोप लगाया है.
उन्होंने कहा कि आठ सप्ताह की अवधि 14 जनवरी, 2025 को ही समाप्त हो गई, लेकिन कोर्ट के आदेश के अनुरूप किसी विस्तृत कार्य योजना या एसओपी के निर्माण या कार्यान्वयन के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है. उन्होंने यह जवाब तलब स्कूलों में बम की अफवाह पर लगाम लगाने एवं उसको लेकर उचित कदम उठाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए की.
याचिका में कहा गया है कि प्राधिकारी कोर्ट के 14 नवंबर, 2024 के आदेश की अवमानना कर रहे हैं. उस आदेश में प्रादिकारी से ऐसे मामलों से निपटने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के साथ एक व्यापक कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया गया था. निर्देश में सरकारी एजेंसियों एवं पुलिस को निर्देश जारी होने के आठ सप्ताह के भीतर तंत्र विकसित करने को कहा गया था.
ये भी पढ़ें: मकोका मामला: पूर्व आप विधायक नरेश बालियान के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने तिहाड़ से दाखिल की चार्जशीट
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



