दिल्ली हाई कोर्ट ने मां बेटी के रिश्ते को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने शेक्सपियर की ‘मर्सी’ का हवाला देते हुए हत्या के प्रयास का मामले को रद्द कर दिया है. जिसपर अपने गार्जियन की हत्या की कोशिश का आरोप था. जस्टिस प्रतीक जालान ने कहा कि अगर न्याय को कभी दया के साथ मिलाना है, तो यह एक सही मामला है.
भावनात्मक संबंधों को दी प्राथमिकता
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच का रिश्ता मां, बेटी के जैसा है, जो सामाजिक रूप से अद्वितीय और पवित्र है. अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 528 के तहत अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह फैसला सुनाया है. कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते और उनके भावनात्मक संबंधों को प्राथमिकता दी.
क्या था मामला?
मामला 1993 का है. एंटोनेट पामेला फर्नाडीज और उनके लीगल गार्जियन के बीच का मामला है. एंटोनेट एक अनाथ बच्ची थी, जिसको तीन साल की उम्र से ही दशकों तक बेटी की तरह पाला गया, उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और परिवार के सदस्यों की तरह रही. लेकिन फरवरी 2019 में जब उसने अपने लीगल गार्जियन पर चाकू से हमला किया उसके बाद रिश्ता टूट गया.
बता दें कि शुरुआत में एफआईआर धारा 308 (गैर इरादतन) के तहत दर्ज की गई थी, लेकिन बाद में निचली अदालत ने इसे धारा 307 (हत्या के प्रयास) के तहत आरोप तय किया था.
जघन्य और गंभीर आरोप
वर्ष 2022 में दोनों पक्षों ने लोक अदालत के माध्यम से विवाद को सुलझा लिया था. इसके बाद सितंबर 2024 में शिकायतकर्ता ने याचिकाकर्ता को माफ करते हुए विवाद को खत्म करने की इच्छा जताई.
सरकारी वकील ने इसका जमकर विरोध करते हुए याचिका खारिज करने की मांग की. धारा 307 एक जघन्य और गंभीर आरोप है, जो समाज के खिलाफ माना जाता है. उन्होंने कहा कि मामले में गवाही शुरू हो चुकी है, शिकायतकर्ता ने आरोपों का समर्थन करते हुए जिरह का सामना भी किया है.
लिहाजा मुकदमें को खत्म नही किया जाए. लेकिन कोर्ट ने सरकारी वकील की इस दलील को खारिज करते हुए मुकदमें को रद्द करने का आदेश दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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