दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भारतीय पहलवानों के चयन को लेकर चल रही अनिश्चितता पर गहरी चिंता जताई है. अदालत ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में इस समय कोई सक्षम निकाय नहीं है, जो इन स्पर्धाओं के लिए पहलवानों का चयन कर सके.
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए समय दिया है. अदालत ने कहा कि यदि तदर्थ समिति को बहाल कर दिया जाता है, तो उसकी ओर से चुने गए पहलवानों को यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) मान्यता देगा.
एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप के लिए पहलवानों के चयन पर संशय
कोर्ट ने आगामी एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) की चयन समिति को दो खिलाड़ियों को नामित करने की अनुमति दी है. पीठ ने कहा कि 25 मार्च को टूर्नामेंट होना है, और चयन प्रक्रिया में समय लग सकता है, इसलिए जल्द समाधान निकालना जरूरी है.
कोर्ट ने डब्ल्यूएफआई की अपील पर सुनवाई 11 मार्च तक टाल दी, क्योंकि पक्ष इस मुद्दे पर आम सहमति तक नहीं पहुंच सके. केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि 10 मार्च तक यह तय कर लिया जाएगा कि महासंघ का निलंबन जारी रहेगा या नहीं.
पहलवानों के लिए अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भागीदारी पर खतरा
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) केवल राष्ट्रीय महासंघों द्वारा चुने गए एथलीटों को ही अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भाग लेने की अनुमति देता है.
पीठ ने यह भी पाया कि न तो भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने महासंघ के मामलों को देखने के लिए तदर्थ समिति को बहाल किया और न ही केंद्र ने हाईकोर्ट के एकल पीठ के आदेश के अनुसार महासंघ के निलंबन को जारी रखने या हटाने पर कोई निर्णय लिया है.
डब्ल्यूएफआई के वकील ने कोर्ट को बताया कि एकल पीठ के आदेश के कारण भारतीय पहलवान कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों से चूक चुके हैं. इसके अलावा, इस महीने के अंत में होने वाली एशियाई चैंपियनशिप में उनकी भागीदारी भी अब मुश्किल हो सकती है, क्योंकि नामांकन की अंतिम तिथि 4 मार्च को समाप्त हो चुकी है.
अब डब्ल्यूएफआई ने यूडब्ल्यूडब्ल्यू से समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है ताकि भारतीय पहलवानों को टूर्नामेंट में भाग लेने का मौका मिल सके.
-भारत एक्सप्रेस
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