दिल्ली हाई कोर्ट ने लंदन में दर्जनों जजों के बैडमिंटन टूर्नामेंट खेलने की खबर को मनगढ़ंत और झूठी बताने वाली बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से दाखिल याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में आदेश पारित करेगा.
न्यायपालिका की हो रही बदनामी
बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से पेश वकील ने कहा कि इस खबर का खंडन करने के बावजूद यह फर्जी न्यूज सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रही है, जिससे न्यायपालिका के साथ-साथ खेल की बदनामी हो रही है. हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस दावे से जुड़े वीडियो और अन्य सामग्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया जाए. हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को सब्सक्राइबर की जानकारी देनी होगी और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को कानून के मुताबिक जांच कराने का निर्देश दिया.
बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने दलील दी कि सफाई देने के बावजूद यह फर्जी रिपोर्ट ऑनलाइन फैलाई जा रही है, जिससे न्यायपालिका और खेल, दोनों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँच रहा है. बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इन खबरों को फर्जी बताते हुए इन्हें हटाने की मांग की है.
कंपनियों ने किया था टूर्नामेंट को प्रायोजित
खबरों के मुताबिक, दर्जनों जज और वकील दूसरे अंतरराष्ट्रीय बार एंड बेंच बैडमिंटन चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए ब्रिटेन गए थे. 7 जून को लंदन के साउथॉल में भारत और ब्रिटेन के वकीलों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन टूर्नामेंट का आयोजन किया गया था.
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बताया जा रहा है कि इसका आयोजन पूर्व अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी और डेका इवेंट्स की संस्थापक आबंतिका डेका ने किया था. इस कार्यक्रम को भारत के केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के साथ-साथ कुछ कॉर्पोरेट कंपनियों ने भी प्रायोजित किया था.
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