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रवि किशन मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का लिखित आदेश: गूगल, मेटा और एक्स को कोर्ट का सख्त फरमान

दिल्ली हाई कोर्ट ने भाजपा सांसद रवि किशन के पर्सनैलिटी राइट्स मामले में लिखित आदेश जारी करते हुए गूगल, मेटा और एक्स को 72 घंटे के भीतर उनके खिलाफ मौजूद अश्लील और अपमानजनक कंटेंट हटाने का निर्देश दिया है.

DELHI HIGH COURT

बीजेपी सांसद और भोजपुरी फिल्म अभिनेता रवि किशन के पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट के लिखित आदेश की कॉपी आ गई है. जस्टिस ज्योति सिंह की बेंच ने रवि किशन के पक्ष में यह अंतरिम आदेश जारी किया है. हाई कोर्ट ने रवि किशन के खिलाफ अपमानजनक और आपत्तिजनक सोशल मीडिया कंटेंट को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है. अदालत ने इस संबंध में प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स गूगल, मेटा और एक्स (पूर्व में ट्विटर) को कड़े निर्देश जारी किए हैं.

15 अक्टूबर को अगली सुनवाई

अदालत ने अपने लिखित आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि विवादित पोस्ट या सामग्री का प्रकाशन करने वाली मूल संस्थाएं/व्यक्ति उस अश्लील सामग्री को नहीं हटाते हैं, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स रवि किशन द्वारा चिन्हित की गई अश्लील सामग्री और यूआरएल (URL) को 72 घंटों के भीतर अपने प्लेटफॉर्म से ब्लॉक करें या हटाएं. इसके साथ ही, कोर्ट ने रवि किशन की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी अपमानजनक या अश्लील कंटेंट के नए प्रकाशन पर भी पूरी तरह रोक लगा दी है. हाई कोर्ट अब इस मामले में आगामी 15 अक्टूबर को अगली सुनवाई करेगा.

‘कवि किशन’ कहकर किया गया दुष्प्रचार

मामले की सुनवाई के दौरान रवि किशन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरिहरन ने कोर्ट को अवगत कराया था कि एक यूआरएल पर जानबूझकर रवि किशन को “कवि किशन” कहा गया है. उन्होंने यह भी दलील दी थी कि उस प्लेटफॉर्म पर अभिनेता की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाला पोर्नोग्राफिक कंटेंट भी डाला गया है.

सुनवाई के दौरान गूगल की ओर से पेश वकील ने हाई कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि वे चिन्हित किए गए कुछ आपत्तिजनक यूआरएल को हटा देंगे. गूगल ने यह भी बताया कि संबंधित भ्रामक सामग्री अपलोड करने वाले मूल व्यक्ति और मीडिया कंपनी को इस मुकदमे में पहले ही पक्षकार बनाया जा चुका है.

प्रतिष्ठा की सुरक्षा का बड़ा सवाल

दरअसल, यह मामला न केवल रवि किशन के व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़ा है, बल्कि डिजिटल युग में हर आम और खास आदमी, विशेषकर सार्वजनिक हस्तियों की पहचान और प्रतिष्ठा की सुरक्षा के व्यापक सवाल भी उठाता है.

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गौरतलब है कि सेलिब्रिटी और पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए इससे पहले अर्जुन कपूर, अल्लू अर्जुन, गौतम गंभीर, फिल्म अभिनेत्री काजोल, विवेक ओबेरॉय, बाबा रामदेव, सलमान खान, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन, आराध्या बच्चन, जैकी श्रॉफ, अनिल कपूर, अजय देवगन, करण जौहर, रजनीकांत, गायिका आशा भोसले, अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, सिंगर कुमार सानू और विराट कोहली सहित कई अन्य नामचीन हस्तियां भी अपनी निजता व छवि के कानूनी बचाव के लिए अदालत का रुख कर चुकी हैं.



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