दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने पति की मौत के बाद भी अपने वृद्ध सास-ससुर को मुकदमें में घसीटने को गंभीरता से लिया और उसके लिए महिला पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है. महिला ने पति की मौत के बाद दूसरी शादी कर ली थी, उसके बावजूद पहले सास-ससुर को मुकदमें में उलझा रखा था. जस्टिस अरुण मोंगा ने कहा कि महिला ने प्रतिशोध के लिए वृद्ध सास-ससुर को घरेलू हिंसा कानून के तहत मुकदमे में घसीट रही है, यह उनके लिए सुनियोजित उत्पीड़न, कठिनाई और अपमान के अलावा कुछ नहीं है. ऐसी कार्यवाही को जारी रखना अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य है.
कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग पर लगाई फटकार
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि न्याय पाने के नाम पर महिला ने कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग करने की हद पार कर दी है. ऐसे आचरण को न्याय शब्द से सम्मानित करना हास्यास्पद होगा. पुनर्विवाह में कोई समय न गंवाते हुए वह अपने दिवंगत पति के वृद्ध माता-पिता के विरु द्ध कार्यवाही जारी रखे हुए है. जैसे विधवा होने के कारण उसे उन्हें परेशान करने का स्थायी अधिकार प्राप्त हो. जबकि दूसरी ओर वे अपने छोटे बेटे की असामयिक मृत्यु का शोक मना रहे हैं. उन्होंने यह कहते हुए वृद्ध याचिकाकर्ता की याचिका को स्वीकार कर लिया जिसमें उन्होंने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें घरेलू हिंसा कानून के तहत उन्हें भी प्रतिवादी बना लिया गया था और समन जारी किया गया था.
दोनों पक्षों की शादी 2011 में हुई थी. उनके बेटे का दिसंबर 2021 में निधन हो गया था. अपने बेटे के जीवनकाल में ही बहू ने अगस्त 2021 में किसी समय महिला अदालत में पति के वृद्ध माता-पिता सहित पांच रिश्तेदारों के खिलाफ घरेलू हिंसा के तहत मुकदमा कर दिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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