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दिल्ली दंगा केस: दस्तावेज निरीक्षण पर SC की रोक, आरोपी देवांगना कलिता को नोटिस जारी

Delhi Riots Case: दिल्ली दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने देवांगना कलिता को दस्तावेज और वीडियो रिकॉर्डिंग देखने की अनुमति देने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है.

Delhi Riots Case

Edited by Sahil Singh

Delhi Riots Case: सुप्रीम कोर्ट ने साल 2020 के दिल्ली दंगा मामले की आरोपी देवांगना कलिता से जुड़े एक अहम मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है. यह रोक दिल्ली पुलिस की उस याचिका पर लगाई गई है, जिसमें हाई कोर्ट के 5 जून 2026 के आदेश को चुनौती दी गई थी. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने देवांगना कलिता को नोटिस जारी कर उनसे जवाब भी मांगा है. यह अंतरिम आदेश जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने दिया.

हाई कोर्ट ने क्या कहा था?

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर आरोपी का अधिकार है. इसलिए देवांगना कलिता को अपने बचाव की तैयारी के लिए मालखाने में रखे दस्तावेज और वीडियो रिकॉर्डिंग देखने की अनुमति दी जानी चाहिए. कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि वह चाहें तो पुलिस के मालखाने में जाकर वीडियो रिकॉर्डिंग का निरीक्षण कर सकती हैं. मालखाना वह सुरक्षित स्थान होता है, जहां पुलिस जब्त किए गए सामान और मामले से जुड़े सबूत सुरक्षित रखती है.

दिल्ली पुलिस ने क्यों जताई आपत्ति?

दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट के इस फैसले का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. पुलिस का कहना है कि हाई कोर्ट का आदेश उचित नहीं है और इससे जांच व मुकदमे की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. इससे पहले दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से भी अनुरोध किया था कि इस मामले की सुनवाई जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच से हटाकर किसी दूसरी बेंच को सौंपी जाए.


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पुलिस का कहना था कि इस मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद 8 जनवरी 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, लेकिन कई महीनों तक आदेश नहीं सुनाया गया. पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि तीन महीने के भीतर फैसला नहीं आता है तो पक्षकार मामले को दूसरी बेंच में स्थानांतरित करने की मांग कर सकता है. देवांगना कलिता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर उन वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग की थी, जिन्हें अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ सबूत के रूप में इस्तेमाल कर रहा है.

-भारत एक्सप्रेस



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