दिल्ली हाईकोर्ट
Delhi Riots: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगे के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पाषर्द ताहिर हुसैन की नियमित जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने दिल्ली पुलिस एवं ताहिर के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
पुलिस ने जमानत दिए जाने का विरोध किया है. पुलिस ने कहा है कि आरोपियों को शांत कराने एवं उनसे कानून हाथ में न लेने का आग्रह करते समय शर्मा को पकड़कर घसीटा गया और धारदार हथियार से 51 बार वार करने के बाद उनके शव को पास के नाले में फेंक दिया गया था.
मुस्तफाबाद से उम्मीदवार बने ताहिर हुसैन
पिछली सुनवाई में भी दिल्ली पुलिस ने कहा था कि ताहिर हुसैन जेल में रहते हुए भी नामांकन दाखिल कर सकते है ऐसे कई उदाहरण है, जहां जेल से नामांकन दाखिल किया गया है. वही ताहिर हुसैन की ओर से पेश वकील ने कहा था कि चुकी AIMIM एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है. इसलिए उसे अपनी सभी सम्पत्तियों का हिसाब दाखिल करना होगा. साथ ही नामांकन के लिए एक प्रस्ताव देना होगा. जिसपर सुनवाई करते हुए जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि जेल में बैठकर भी नामांकन भरा जा सकता है.
ताहिर हुसैन ने हाल ही में असउद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का सदस्य बना है और पार्टी ने उसे मुस्तफाबाद निर्वाचन क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया है. ताहिर हुसैन पर दिल्ली दंगा की साजिश रचने का आरोप है.
साल 2020 फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में ये दंगे हुए थे और कई लोगों की जान गई थी. ताहिर हुसैन पर दंगे भड़काने और उनकी फंडिंग सहित अन्य आरोप है. दंगे के समय ताहिर हुसैन आम आदमी पार्टी के पार्षद थे, लेकिन आरोपी साबित होने पर पार्टी ने उन्हें निकाल दिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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