अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह पर ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है. ईडी ने यह कार्रवाई फेमा के उल्लंघन के मामले में की है. वेदांता का डिमर्जर हो गया है और अब इसकी अलग हुई 4 नई कंपनियों की लिस्टिंग इसी महीने शेयर बाजार में होने जा रही है. लेकिन उसके पहले ही ईडी की इस कार्रवाई ने वेदांता समूह के फाउंडर और चेयरमैन अनिल अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं.
1500 करोड़ के फेमा उल्लंघन का शक, छापेमारी संपन्न
ईडी के अधिकारी दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों को खंगाल रहे हैं और कार्रवाई अभी भी जारी है. अधिकारियों ने बताया कि तलाशी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के उल्लंघन की जांच का हिस्सा है. ईडी को 1500 करोड़ रुपए के फेमा के उल्लंघन का शक है. ईडी की यह कार्रवाई दिल्ली और मुंबई में वेदांता समूह से जुड़े दो ठिकानों पर छापेमारी कर रही है. ये छापेमारी अब संपन्न हो चुकी है, जो समूह की कंपनियों द्वारा अपनी मूल कंपनी को कथित तौर पर किए गए ब्रांड शुल्क भुगतान से संबंधित है.
देश का सबसे बड़ा नेचुरल रिसोर्सेज ग्रुप है वेदांता
वेदांता समूह भारत का एक प्रमुख बहुराष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन और खनन समूह है. इसकी स्थापना वर्ष 1976 में हुई थी और यह धातु, खनिज, ऊर्जा तथा तेल-गैस क्षेत्रों में कारोबार करता है. समूह का मुख्य व्यवसाय खनन और प्राकृतिक संसाधनों का उत्पादन है. वेदांता ग्रुप देश में सबसे बड़ा नेचुरल रिसोर्सेज कंपनी है. कंपनी जिंक, चांदी, ऑयल एंड गैस, एल्युमिनियम, आयरन व स्टील और कॉपर की माइनिंग करती है. इसकी सहयोगी कंपनियों में हिंदुस्तान जिंक और केयर्न ऑयल एंड गैस शामिल हैं.
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क्या है फेमा (FEMA) कानून?
फेमा साल 1999 में लाया गया था. इसका उद्देश्य भारत में विदेशी भुगतान, निवेश और पूंजी को बढ़ावा देना है, ताकि निर्यात में वृद्धि हो सके और भारत में विदेशी मुद्रा का चलन बढ़ सके. यह भारत के नागरिकों को विदेश में संपत्ति अर्जित करने का सुरक्षित विकल्प देता है.
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