प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रियल एस्टेट कंपनी इम्पीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड, इम्पीरिया स्ट्रेक्चर्स लिमिटेड, उनके प्रमोटर, निदेशकों और मौजूदा रेजोल्यूशन प्रोफेशनल से जुड़े ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की है. ईडी की यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दर्ज इसीआईआर के तहत की गई है.
यह मामला दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में दर्ज अलग-अलग एफआईआर के आधार पर की गई है. एजेंसी के मुताबिक कंपनी के प्रमोटरों ने निवेशकों और घर खरीदारों को फ्लैट और तय समय पर रिटर्न देने का झांसा देकर करोड़ो रूपये जुटाए, लेकिन परियोजनाएं पूरी नही की. साथ ही निवेशकों के पैसे को दूसरी कंपनियों और संबंधित लोगों ने उसका दुरुपयोग किया. जांच में यह भी सामने आया है कि गुरुग्राम के सेक्टर 37 स्थित एल्वेडोर प्रोजेक्ट के खरीदारों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल अन्य देनदारियां चुकाने और संबंधित संस्थाओं को लोन व एडवांस देने में किया गया.
कंपनी ने वर्ष 2011से फ्लैट की बुकिंग शुरू किया था, लेकिन 15 साल बाद भी घर खरीदारों को घर समय पर दिया. एजेंसी के.अनुसार इम्पीरिया स्ट्रेक्चर्स लिमिटेड ने गुरुग्राम के माइंडस्पेस और ग्रेटर नोएडा के इम्पीरिया बिजनेस पार्क प्रोजेक्ट में भी खरीदारों से एडवांस बुकिंग लेकर मासिक एश्योर्ड रिटर्न और बाद में लीज रिटर्न का वादा किया था, लेकिन अपने वादे पूरे नहीं किए.
एल्वेडोर प्रोजेक्ट से 63 करोड़ रुपये जुटाने का दावा
जांच में ऐसे कई मामले भी सामने आए हैं, जहां एक ही यूनिट कई खरीदारों को बेच दी गई और खरीदारों के साथ केवल एमओयू किए गए, जिनमें यूनिट की पहचान और कब्जा देने की समयसीमा तक तय नहीं थी. ईडी की जांच के अनुसार एल्वेडोर प्रोजेक्ट से करीब 63 करोड़ रुपये जुटाए गए थे. अन्य परियोजनाओं में कथित अपराध से अर्जित रकम का आकलन अभी किया जा रहा है.
छापेमारी के दौरान ईडी ने कई डिजिटल उपकरण, वित्तीय रिकॉर्ड, फंड डायवर्जन से जुड़े दस्तावेज, खरीदारों के निवेश का ब्यौरा, प्रमोटरों की संपत्ति से जुड़े कागजात जब्त किए. इसके अलावा 50.50 लाख रुपये नकद और तीन लग्जरी वाहन भी बरामद कर जब्त किए गए हैं.
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भारत एक्सप्रेस
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