प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे एनआरआई (प्रवासी भारतीय) के नाम पर हाउसिंग लोन हासिल करने से जुड़े एक बड़े मामले में बड़ी कार्रवाई की है. जांच एजेंसी ने दिल्ली-एनसीआर, चंडीगढ़ और बेंगलुरु में कुल 13 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है.
जांच के दायरे में कंपनियां
ईडी की इस कार्रवाई के दौरान मुख्य रूप से अंतरिक्ष प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और सनशाइन इंफ्रावेल से जुड़े ठिकानों पर छापे मारे गए हैं. जांच एजेंसी इन दोनों कंपनियों की संलिप्तता और भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रही है. एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हाउसिंग लोन हासिल करने के लिए जाली दस्तावेज तैयार करने, बैंकों में आवेदन जमा करने और लोन की भारी-भरकम रकम के लेनदेन में इन कंपनियों की क्या और कितनी भूमिका रही है.
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कैसे चल रहा था पूरा फर्जीवाड़ा?
जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल: संदिग्धों और कंपनियों पर गंभीर आरोप है कि उन्होंने फर्जी और मनगढ़ंत दस्तावेजों का इस्तेमाल करके बैंकों से एनआरआई हाउसिंग लोन स्वीकृत कराए.
लेखा-जोखा और मनी लॉन्ड्रिंग: लोन के रूप में प्राप्त राशि को कई अलग-अलग बैंक खातों में तेजी से ट्रांसफर किया गया, ताकि पैसों के वास्तविक स्रोत (Source) और अवैध लेनदेन की कड़ियों को छिपाया जा सके.
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सत्यापन प्रक्रिया की अनदेखी
ईडी का मुख्य फोकस उन दस्तावेजों की सत्यता की जांच करना है, जिनके आधार पर एनआरआई के नाम पर भारी-भरकम लोन पास किए गए. एजेंसी यह भी जांच रही है कि पहचान पत्र, संपत्ति के कागजात और आय से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन (Verification) की अनिवार्य प्रक्रिया को कथित तौर पर किन मिलीभगत के जरिए दरकिनार किया गया.
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