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आर्म्स डीलर संजय भंडारी की बढ़ेंगी मुश्किलें, संपत्ति जब्ती पर 28 फरवरी को राऊज एवेन्यू कोर्ट सुनाएगा फैसला

आर्म्स डीलर संजय भंडारी को भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद उनकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर राऊज एवेन्यू कोर्ट 28 फरवरी को फैसला सुनाएगा.

आर्म्स डीलर संजय भंडारी को भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद उनकी संपत्ति जब्त करने की प्रवर्तन निदेशालय की मांग वाली याचिका पर राऊज एवेन्यु कोर्ट 28 फरवरी को फैसला सुनाएगा. पिछले.दिनों कोर्ट ने सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.

मामले की सुनवाई में संजय भंडारी की ओर से पेश वकील ने ईडी द्वारा दाखिल हलफनामे में संलग्न दस्तवेज़ों पर सवाल उठाया था. उन्होंने कहा था कि इन दस्तावेजों को अदालत में इस्तेमाल करने की अनुमति नही दी जानी चाहिए. उनकी.दलील थी कि ईडी मूल दस्तवेज़ों से अलग नए दस्तावेज दाखिल कर रही है, जिसकी इजाजत कोर्ट को नहीं देनी चाहिए. ईडी की दलील थी कि जिन संपत्तियों की लिस्ट बनाई गई है, उन पर किसी भी तीसरे पक्ष ने आपत्ति नहीं जताई है. इससे जब्ती का रास्ता और आसान हो गया है.

ईडी ने दलील दी थी कि भंडारी ने अपराध से अर्जित धन को इन संपत्तियों में लगाया था और अब इन्हें जब्त करना कानूनन जरूरी है. ईडी की ओर से दायर याचिका में दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम की प्राइम रियल एस्टेट के अलावा लंदन और दुबई में स्थित कई लग्जरी संपत्तियां भी शामिल हैं. संजय भंडारी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामला दर्ज है और वह 2016 में ब्रिटेन भाग गया था. उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी हुआ था.

संजय भंडारी पर मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी का आरोप

हाल ही में ब्रिटेन की अदालत ने उसके प्रत्यर्पण से संबंधित ईडी की याचिका को खारिज कर दिया था. आयकर विभाग ने उसके खिलाफ 2015 में मुकदमा दर्ज किया था, जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मुकदमा दर्ज किया था. उस पर काला धन को विदेश भेजने, टैक्स की चोरी करने और रक्षा सौदों में रिश्वत लेने का आरोप है. भंडारी को 2020 में ब्रिटेन की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. भंडारी के वकील ने 19 अप्रैल को भगोड़ा घोषित करने की मांग का विरोध किया था और कहा था कि ब्रिटेन में वह कानून के तहत रह रहा है. लंदन हाई कोर्ट ने उसे भारत प्रत्यर्पित करने से मना कर दिया है. भंडारी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने यह भी कहा था कि उनके मुवक्किल का ब्रिटेन में रहना पूरी तरह वैध है और भारत सरकार यूके की अदालत के आदेश की अवहेलना नहीं कर सकती है.

भंडारी की ओर से पेश वकील ने यह भी कहा था कि ईडी की याचिका फगिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट की आवश्यक शर्ते पूरी नहीं करती. उन्होंने कहा था कि इस कानून के तहत आरोपी को तभी भगोड़ा घोषित किया जा सकता है जब उस पर लगे आरोपों की राशि 100 करोड़ या उससे अधिक हो. लेकिन आयकर विभाग के दिल्ली हाई कोर्ट में खुद स्वीकार किया था कि संजय भंडारी के खिलाफ कथित कर चोरी और काले धन के आरोपों की राशि 100 करोड़ से कम है.

भंडारी का नाम कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बहनोई रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ धन शोधन मामले में ईडी की जारी जांच में भी सामने आया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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