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‘डिस्काउंट पर क्रिप्टो ले लो!’… टेलीग्राम पर भरोसा जीता, फिर लगाया करोड़ो का चूना; ईडी ने किया कार्रवाई

क्रिप्टोकरेंसी के ओटीसी ट्रेडिंग के नाम पर हुए करीब 35 मिलियन डॉलर (300 करोड़ रुपये से अधिक) के अंतरराष्ट्रीय घोटाले का ईडी ने पर्दाफाश किया है.

मनी लॉन्ड्रिंग और 131.79 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड केस में ईडी ने बिहार, दिल्ली और हरियाणा में रामानंदी होटल्स के ठिकानों पर छापेमारी की.

131 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड मामले में ईडी ने 9 ठिकानों पर मारी रेड.

क्रिप्टोकरेंसी में ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) ट्रेंडिंग के नाम पर किए गए ठगी के मामले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने अंतरराष्ट्रीय ठगी के मामले में कई अहम सबूत बरामद किया है. ईडी ने 35 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 300 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का पर्दाफाश किया है. शुरुआती एफआईआर में 10 मिलियन की बात कही जा रही थी. ईडी की बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने यह जांच दक्षिण अंडमान साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की.

शिकायत एक डच कंपनी की ओर से दी गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने सस्ते दाम पर लोकप्रिय क्रिप्टो टोकन उपलब्ध कराने का झांसा देकर करोड़ों डॉलर की ठगी की गई है. ईडी के मुताबिक मोहम्मद वसीम, सौरभ दीवान और वैभव गुप्ता ने टेलीग्राम ग्रुप, सोशल मीडिया और व्यक्तिगत मुलाकातों के बाद निवेशकों का भरोसा जीता. शुरुआत में छोटे-छोटे ओटीसी सौदे सफलतापूर्वक पूरे किए गए ताकि निवेशक बड़ी रकम लगाने के लिए मजबूर हो सके.

इसके बाद उन्होंने दावा किया कि उनके पास MultiverseX, Kava, BEAM, GRASS, SUI, VANA और AGLD जैसे चर्चित क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स के डिस्काउंटेड टोकन उपलब्ध है, लेकिन निवेश मिलने के बाद वादा किए गए टोकन नही दिया गया.

क्रिप्टो ठगी मामले में ईडी की कार्रवाई

ईडी ने यह भी खुलासा किया है कि निवेशकों से प्राप्त क्रिप्टोकरेंसी को विभिन्न वॉलेट्स के जरिए बेंगलुरु निवासी रविन्द्र के तक पहुचाया गया. ईडी की यह कार्रवाई 18 और 19 जुलाई को की गई है. छापेमारी के दौरान ईडी ने डिजिटल डिवाइस, ईमेल रिकॉर्ड और क्रिप्टो वॉयलेट सहित कई अहम डिजिटल साक्ष्य जब्त किया है. इसके अलावे ईडी ने 8700 USDT मूल्य की वर्चुअल डिजिटल एसेट्स भी बरामद किया है.

जांच के दौरान ईडी को यह भी पता चला है कि आरोपी खुद को क्रिप्टो इंडस्ट्री का “Key Opinion Leader” बताकर सोशल मीडिया पर निवेशकों को लुभाते थे. वे भारी मुनाफे का लालच देकर निवेश कराते थे और बाद में या तो टोकन नहीं देते या वादा किया गया वापस नही करते थे. ईडी के अनुसार ठगी से अर्जित रकम का इस्तेमाल निजी संपत्तियां खरीदने, कारोबार और व्यक्तिगत खर्चो में किया गया.

जांच एजेंसी ईडी ने यह भी कहा है कि इस फर्जीवाड़े का शिकार सिर्फ भारतीय ही नही हुए हैं, बल्कि कई विदेशी नागरिकों को भी इसका शिकार बनाया गया है. हालांकि उन्होंने अभी तक इसको लेकर कोई शिकायत दर्ज नही कराई है.

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-भारत एक्सप्रेस



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