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केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में मांगी बिना शर्त माफी, प्राइवेट यूनिवर्सिटी जांच से जुड़ा है मामला

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने प्राइवेट विश्वविद्यालयों के रेगुलेशन से जुड़े आदेश के पालन में देरी पर सुप्रीम कोर्ट में माफीनामा दाखिल किया है. जानें क्या है आयशा जैन का पूरा मामला?

Ashoka Pillar

प्राइवेट यूनिवर्सिटी की जांच से संबंधित मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर माफी मांगी है. मंत्रालय ने यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में हो रही देरी पर दायर किया है. मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा है कि वह कोर्ट के आदेश का अनुपालन न करने या किसी भी उल्लंघन पर बिना शर्त क्षमा मांगता है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वह आदेश की अवहेलना के बारे में सोच भी नहीं सकता है.

जांच समितियों का गठन

हलफनामे के जरिए कोर्ट को सूचित किया गया है कि रेगुलेटरी निगरानी और जांच के लिए कमेटियों का गठन कर दिया गया है. डॉ. आर. एम. शर्मा के नेतृत्व में एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जबकि शुरुआती जांच के लिए पूर्व आईपीएस अशोक प्रसाद की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है. यह कदम देशभर में संचालित निजी विश्वविद्यालयों के कामकाज की समीक्षा के लिए उठाया गया है.

छात्रा आयशा जैन की याचिका

दरअसल, यह मामला नोएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी की एक छात्रा से जुड़ा हुआ है, जिसने अपना नाम खुशी से बदलकर आयशा रख लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने आयशा की याचिका पर केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से सभी प्राइवेट और डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी के निर्माण, उनके कामकाज और रेगुलेटरी निगरानी के बारे में पूरी जानकारी मांगी थी. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने छात्रा द्वारा यूनिवर्सिटी को उसका ऑफिशियल नाम बदलने का निर्देश देने के लिए दायर रिट याचिका पर यह आदेश दिया था.

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रेगुलेशन और नाम बदलने का कानूनी मुद्दा

दायर याचिका में देशभर में चल रही प्राइवेट यूनिवर्सिटी को सही तरीके से रेगुलेट नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया गया है. याचिकाकर्ता आयशा जैन एमबीए (एंटरप्रेन्योरशिप) की छात्रा है. उन्होंने वर्ष 2021 में व्यक्तिगत कारणों से अपना नाम खुशी जैन से बदलकर आयशा जैन कर लिया था और इसे भारत के गजट में प्रकाशित भी कराया था, जो कानूनी रूप से नाम बदलने की मान्य प्रक्रिया है. उनके सभी आवश्यक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य आईडी प्रूफ नए नाम पर अपडेट हो चुके थे, लेकिन यूनिवर्सिटी रिकॉर्ड में नाम बदलने को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था.



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