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तदर्थ जजों की नियुक्ति पर हाई कोर्ट्स की उदासी, सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के 5 महीने बाद भी नहीं भेजे गए प्रस्ताव

सुप्रीम कोर्ट द्वारा तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दिए जाने के पांच महीने बाद भी किसी भी हाई कोर्ट ने अब तक नामों का प्रस्ताव नहीं भेजा है, जबकि देश में 18 लाख से अधिक आपराधिक मामले लंबित हैं.

supreme court

सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगभग पांच महीने पहले मंजूरी दिए जाने के बावजूद विभिन्न हाई कोर्ट में लंबित आपराधिक मामलों से निपटने के लिए तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर इच्छुक नही दिख रहे हैं. देश में 25 हाईकोर्ट्स है, लेकिन 11 जून तक किसी भी हाई कोर्ट के कॉलेजियम ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के नाम की केंद्रीय कानून मंत्रालय को ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं भेजा है.

सुप्रीम कोर्ट ने 18 लाख से ज्यादा आपराधिक मामलों के लंबित रहने को देखते हुए 30 जनवरी को हाई कोर्ट्स को तदर्थ न्यायधीशों की नियुक्ति करने की इजाजत दे दी थी, बशर्ते इनकी संख्या अदालत के लिए स्वीकृत कुल न्यायाधीशों के पदों के 10 फीसदी से ज्यादा नहीं हो.

18 लाख लंबित मामलों को देखते हुए SC की सिफारिश

बता दें कि देश भर के हाई कोर्ट्स में लंबित मामलों, विशेष रूप से आपराधिक अपीलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एडहॉक जजों की नियुक्ति करने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि प्रत्येक हाई कोर्ट एडहॉक जजों की नियुक्ति 2-5 की संख्या में रखेगा, लेकिन स्वीकृत संख्या के 10 फीसदी से अधिक नही होना चाहिए.

कोर्ट ने कहा था कि एडहॉक जज हाई कोर्ट के एक मौजूदा जज की अध्यक्षता वाली पीठ में बैठेंगे. वो पीठ की अध्यक्षता नही करेंगे. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि देश भर के हाइकोर्ट्स में लंबित मुकदमों का मुख्य कारण जजों की कमी है.

जजों की भारी कमी बनी लंबित मुकदमों की बड़ी वजह

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हाई कोट्स में जरूरत पड़ने पर अस्थायी जज नियुक्त किये जा सकते है. इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 224A का इस्तेमाल करना पड़ेगा. हर जज पर बहुत ज्यादा केस है. इसलिए 2021 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बदलाव जरूरी है.

अप्रैल 2021 में दिए गए फैसले में कोर्ट ने हाई कोर्ट्स में एडहॉक जजों की नियुक्ति को लेकर फैसला दिया था. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि नियमित न्यायधीशों की नियुक्ति के बजाए, तदर्थ आधार पर न्यायधीशों की नियुक्ति करने के खिलाफ भी चेतावनी दी थी.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि तदर्थ न्यायधीशों को नियमित न्यायधीशों की नियुक्ति के लिए कुछ शर्तें निर्धारित किया था. इनमें से एक शर्त यह था कि तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति तभी की जा सकती है जब संबंधित हाई कोर्ट में जजों की रिक्तियां स्वीकृत पद से 20 फीसदी या इससे अधिक हो.

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-भारत एक्सप्रेस 



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