उपराष्ट्रपति के लिए इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार पूर्व जस्टिस सुदर्शन रेड्डी सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रह चुके है. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐतिहासिक फैसले दिए, जिनके लिए उनको आज भी याद किया जाता है. वो 2007 से 2011 तक सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रहे.
पूर्व जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी की अध्यक्षता वाली पीठ पर काला धन मामले की जांच की निगरानी के लिए 4 जुलाई 2011 को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बी पी जीवन रेड्डी की अध्यक्षता में एसआईटी के गठन का निर्देश दिया था. हालांकि इसको लेकर केंद्र सरकार की ओर से समीक्षा याचिका दायर की गई थी.
विदेशों में जमा काले धन का पता लगाया जाए
वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर मांग की थी कि विदेशों में जमा काले धन का पता लगाया जाए और उस राशि को भारत वापस लाया जाए. इसके अलावे जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी ने माओवादियों से लड़ने के लिए सलवा जुडूम का इस्तेमाल किए जाने का नाराजगी जाहिर करते हुए केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा विशेष पुलिस अधिकारियों को हथियार देने पर रोक लगाते हुए, 5000 जवानों वाले इस बल को असंवैधानिक करार दिया था.
कोर्ट ने हिंसा के लिए बाबा रामदेव को ठहराया दोषी
जस्टिस रेड्डी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में साल 2011 में बाबा रामदेव के समर्थकों और दिल्ली पुलिस के बीच हुई झड़प पर बाबा रामदेव और दिल्ली पुलिस दोनों को फटकार लगाई थी. कोर्ट ने रामलीला मैदान में हुई हिंसा के लिए दिल्ली पुलिस और बाबा रामदेव दोनों को दोषी ठहराया था. कोर्ट ने आदेश दिया था कि घटना में हिंसा फैलाने के लिए दोषी पाए गए रामदेव के समर्थकों और दिल्ली पुलिस के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने को कहा था. उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य को न्यूनतम बल प्रयोग करना चाहिए और अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करना चाहिए.
निष्क्रिय इच्छामृत्यु को कुछ शर्तों के साथ वैध ठहराया
इसके अलावे जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी ने मुंबई डांस बार में सीसीटीवी लगाने के सुझाव को खारिज कर दिया था. उन्होंने कहा था कि महिलाओं के काम करने के अधिकार और आजीविका की स्वतंत्रता को केवल नैतिकता के नाम पर नही छीना जा सकता है.
उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को दो दिनों के भीतर आठ डांस बारों को लाइसेंस देने का निर्देश दिया था और उनसे यह वचन देने को कहा था कि वे डांस क्षेत्र के निकट आपराधिक पृष्ठभूमि वाले कर्मचारियों को नही रखेंगे. इसके अलावे जस्टिस रेड्डी ने निष्क्रिय इच्छामृत्यु को कुछ शर्तों के साथ वैध ठहराया था.
भारत एक्सप्रेस
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