आईटी मंत्रालय ने डीपफेक को रोकने के लिए नए नियम बनाए हैं.
IT Rules Amendment: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के हो रहे दुरुपयोग, खासकर डीपफेक सामग्री (DeepFake Content) के बढ़ते चलन ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने AI-जनरेटेड सामग्री से होने वाले नुकसान से निपटने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों में बड़े बदलाव करने का मन बनाया है. प्रस्तावित बदलावों का सीधा असर फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब सहित AI कंटेंट बनाने वाले सभी सोशल मीडिया यूजर्स और प्लेटफार्मों पर पड़ेगा.
वायरल भ्रामक सामग्री से भारी नुकसान
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि डीपफेक ऑडियो-वीडियो और सोशल मीडिया पर वायरल भ्रामक सामग्री से भारी नुकसान हो सकता है. इससे न केवल किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को गंभीर हानि पहुँच सकती है, बल्कि चुनावों को प्रभावित किया जा सकता है और वित्तीय धोखाधड़ी भी हो सकती है. सरकार ने मसौदा विनियमों पर संबंधित पक्षों से 6 नवंबर तक अपनी राय और सुझाव मांगे हैं.
विशेषज्ञों ने सराहा, कड़े कानून की मांग
साइबर लॉ एक्सपर्ट पवन दुग्गल ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि AI के दुरुपयोग को रोकने के लिए अभी तक कोई कानून नहीं है, और यह लोगों की जिंदगी को तहस-नहस कर सकता है, इसलिए कानून लाना जरूरी है. उन्होंने सरकार द्वारा सर्विस प्रोवाइडर पर जिम्मेदारी डालने का समर्थन किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इस कदम का विस्तार करना होगा और AI के दुरुपयोग को रोकने के लिए भारत सरकार को विशेष कानून लाना चाहिए. उन्होंने लोगों में जागरूकता बढ़ाने और सर्विस प्रोवाइडर पर सख्त पहरा लगाने की आवश्यकता पर बल दिया.
सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रमोद चौधरी ने कहा कि सरकार जो कानून ला रही है, वह काफी नहीं है और AI के दुरुपयोग पर लगाम लगाने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सरकार कड़ा कानून नहीं लाएगी, तब तक AI के दुरुपयोग पर लगाम लगाना मुश्किल होगा.
नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. की चेतावनी
हाल ही में वर्ष 2025 के नोबेल अर्थशास्त्र पुरस्कार विजेता कनाडाई प्रोफेसर पीटर हॉविट ने भी चेतावनी दी है कि अगर AI पर समय रहते नियंत्रण नहीं लगाया गया तो इसका असर समाज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. चीन सहित कई देश पहले ही ऐसे कानून ला चुके हैं.
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