सुप्रीम कोर्ट
Supreme Court Petition: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दायर की गई है. दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की गई है. साथ ही दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित करने की मांग की गई है.
वकील की ओर से याचिका दायरjantar-mantar-police-action-supreme-court-petition
यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील नरेंद्र मिश्रा की ओर से दायर की गई है. मिश्रा ने इससे पहले भी लेटर पिटीशन भेज कर स्वतः संज्ञान लेने की मांग की थी. दायर याचिका में कहा गया है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया. प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और कई लोगों को हिरासत में लिया गया.
संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत संरक्षित
साथ ही यह भी आरोप है कि कुछ सादे कपड़ों में मौजूद लोगों ने भी प्रदर्शनकरियों के साथ मारपीट की, जिसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. याचिकाकर्ता का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अपनी बात रखने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत संरक्षित है. ऐसे में पुलिस की कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.
याचिका में यह भी मांग की गई है कि,
दिल्ली पुलिस के तैनाती रिकॉर्ड, आदेश, सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन फुटेज, बॉडी कैमरा रेकॉर्डिंग, वायरलेस लॉग और अन्य सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए जाएं ताकि सबूतों के साथ छेड़छाड़ न हो सके. इसके अलावा पुलिस अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक होने पर एफआईआर दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है. दायर याचिका में कहा गया है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि प्रदर्शनकरियों पर गैरकानूनी या अत्यधिक बल प्रयोग से घायल लोगो को मुआवजा देने की मांग की गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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