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‘कानून अपने हाथ में ले रही है सरकार…’, डीजीपी नियुक्ति विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, झारखंड सरकार और डीजीपी को नोटिस

झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति और राज्य सरकार द्वारा डीजीपी नियुक्ति के नियमों में बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.

Supreme court

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झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को लेकर दायर केंद्र सरकार की याचिका पर झारखंड सरकार और झारखंड के डीजीपी तदाशा मिश्रा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 3 नवंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि क्या ऐसा कोई नियम है क्या है 6 महीने से कम समय की सेवा वाले अधिकारियों को भी डीजीपी नियुक्त किया जा सकता है.

कोर्ट ने प्रकाश सिंह मामले में दिए गए निर्देश का पालन नही करने पर इसे हितों का टकराव बताया है. कोर्ट ने झारखंड सरकार से पुनर्विचार करने को कहा है. साथ ही कोर्ट ने कहा कि यदि नियम में बदलाव नही करना चाहती है, तो उसे कोर्ट में इसपर अपना बचाव करना होगा. इसको लेकर केंद्र सरकार ने याचिका दायर कर कहा है कि राज्य सरकार ने प्रकाश सिंह मामले में दिए गए निर्देशों का पूरी तरह से अनदेखी की है.

केंद्र सरकार की ओर से दायर अर्जी में कहा गया है कि डीजीपी चुनने के लिए झारखंड सरकार प्रकाश सिंह मामले में दिए गए निर्देशों का उल्लंघन किया है. राज्य सरकार ने इसे नोटिफाई करने से पहले सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी नही ली थी. अनुराग गुप्ता को 2 फरवरी 2025 को दो साल के लिए डीजीपी नियुक्त किया गया था. जबकि उनकी सेवा का कार्यकाल केवल तीन महीने बचा था.

उनकी रिटायरमेंट की तारीख 30 अप्रैल 2025 थी. राज्य सरकार ने 29 दिसंबर 2025 के एक प्रस्ताव के जरिए छह महीने की बची हुई सेवा की शर्त को हटा दिया, जिसके बाद 30 दिसंबर 2025 को तदाशा मिश्रा को डीजीपी नियुक्त किया गया. एमएचए ने 6 जनवरी 2026 को राज्य से नियम और मिश्रा की नियुक्ति को रद्द करने के लिए कहा, क्योंकि वह 31 दिसंबर 2025 को रिटायर होने वाली थी.

डीजीपी नियुक्ति में राज्य सरकार पर उठे सवाल

राज्य ने चयन प्रक्रिया से हटकर दो साल का कार्यकाल देने के लिए प्रकाश सिंह मामले के निर्देशों का चुनिंदा तौर पर इस्तेमाल किया. कोर्ट बाबू लाल मरांडी की ओर से दायर याचिका पर पहले से ही सुनवाई कर रहा है. उन्होंने दायर याचिका में कहा था कि नए नियमों के तहत संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की भूमिका को समाप्त कर दिया गया है, जबकि पहले राज्यों में डीजीपी की नियुक्ति यूपीएससी द्वारा चयनित वरिष्ठ अधिकारियों की पैनल सूची के आधार पर होती थी.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि सरकार कानून अपने हाथ में ले रही है. याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर 2006 को दिए गए अपने आदेश में यह कहा था कि राज्य सरकार डीजीपी के पद पर प्रोन्नत होने वाले अधिकारियों की सूची लोक सेवा आयोग को भेजेगी. आयोग द्वारा तैयार पैनल से सरकार किसी को डीजीपी के पद पर नियुक्त करेगी.

नियुक्ति की तिथि से डीजीपी का कार्यकाल दो साल के लिए होगा, भले ही उसके सेवानिवृत्ति की तिथि पहले हो डीजीपी की नियुक्ति पूरी तरह मेरिट के आधार पर होगी. इसमें किसी तरह का दबाव या प्रभाव का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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