जेएनयू प्रदर्शन के मामले में गिरफ्तार पांच छात्रों को पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिल गई है, लेकिन निजी मुचलके नहीं भरने पर कोर्ट ने 13 मार्च तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.
25 हजार के मुचकले पर जमानत
पटियाला हाउस कोर्ट के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिमेष कुमार ने आरोपी नेहा, रणविजय, वर्के परक्कल और अभिषेक कुमार को 25-25 हजार रुपए की निजी मुचलके पर जमानत दे दिया है. लेकिन जमानत की राशि नहीं भरने और आरोपियों के स्थायी पत्तों के सत्यापन के लिए 13 मार्च तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.
कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि डियूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों पर हमला करना एक गंभीर चिंता का विषय है, जिसे शांतिपूर्ण विरोध के बहाने बर्दाश्त नही किया जा सकता है. हालांकि कोर्ट ने इस बात पर भी विचार किया कि इन अपराधों के लिए अधिकतम पांच साल की सजा का प्रावधान है और आरोपी छात्र हैं, जिनका कोई आदतन अपराध का रिकॉर्ड नहीं है.
घटना में 27 पुलिसकर्मी हुए थे घायल
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में दर्ज किया था. पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारी छात्रों ने कथित तौर पर प्रदर्शन के दौरान बैरिकेट तोड़ दिए थे. इस घटना में 27 पुलिसकर्मी घायल हुए थे. याचिककर्ताओ की ओर से पेश वकील ने जमानत याचिका पर बहस के दौरान कहा कि छात्रों के खिलाफ कोई विशिष्ट आरोप नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि वे शिक्षित व्यक्ति हैं और यूजीसी के नियमों और विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इससे पहले इसी मामले में गिरफ्तार14 लोगों को कोर्ट से जमानत मिल चुकी है. आरोपियों की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा था कि सभी आरोपी जांच में सहयोग करने के लिए तैयार है और इस संबंध में वे अदालत को लिखित आश्वासन देने को भी तैयार है.
बैरिकेडिंग पर धक्का मुक्की
पुलिस ने अदालत को बताया कि करीब 300 लोगों का मार्च बिना अनुमति के शिक्षा मंत्रालय तक मार्च निकालने जा रहे थे. इस दौरान जब पुलिस ने बैरिकेडिंग लगा कर जब उन्हें रोकने की कोशिश की, तो आरोपियों ने पुलिस के साथ धक्का मुक्की शुरू कर दी. जिससे कई पुलिसकर्मियों को चोटे आई. दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि यह शांति पूर्वक प्रदर्शन नहीं था बल्कि प्रदर्शनकारियों द्वारा हिंसा की गई.
मामले में 4 FIR
दिल्ली पुलिस के अनुसार छात्रों की पुलिसकर्मियों के साथ झड़प हुई, जिसमें पुलिस अधिकारी भी घायल हुए. पुलिस ने कहा कि आरोपी पहले भी कई मौकों पर प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग कर चुके हैं और इस संबंध में पहले भी चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी है.
यह मामला तब शुरू हुआ, जब जेएनयू के कुलपति ने जातिवादी टिप्पणियां की. साथ ही यूनिवर्सिटी के कोष में कटौती, पदाधिकारियों के निष्कासन और रोहित एक्ट के साथ संशोधित यूजीसी नियम को लागू करने की मांग को लेकर एक मार्च का आह्वान किया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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