लैंड फॉर जॉब घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में राऊज एवेन्यु कोर्ट में चार्ज पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. सीबीआई के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने सभी पक्षों से लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
कोर्ट 13 अक्टूबर को चार्ज पर फैसला सुनाएगा. पिछली सुनवाई में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की ओर से पेश वकील ने दलील देते हुए कहा था कि उन्होंने जमीन खरीदा था, जिसके बदले पैसे दिए थे. उनके वकील ने यह भी कहा था कि पैसे लेकर जमीन खरीदना कोई अपराध नही है.
जमीन के लिए अनपढ़ों को नौकरी
उन्होंने कहा था कि किसी भी आरोपी को कोई फायदा नही पहुचाया गया. इन लेन देन का आपस में कोई संबंध नही है. राबड़ी देवी के वकील ने कोर्ट से यह भी कहा था कि सीबीआई को लगे आरोपों की जांच करना होगा, और यह साबित करना होगा कि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है.
पिछली सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया था कि उम्मीदवारों को योग्य दिखाने के लिए जाली हस्ताक्षर किए गए. मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर डीपी सिंह ने दावा किया था पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों ने जमीन सौदों के बदले ऐसे लोगों को ग्रुप-डी की नौकरी दी जो अपना नाम तक नहीं लिख सकते थे.
हस्ताक्षर से लेकर अंक पत्र सब जाली
उन्होंने कहा था कि हस्ताक्षर, स्थानांतरण प्रमाण पत्र और अंक पत्र सभी जाली थे. उम्मीदवारों ने अपने आवेदनों में ऐसे स्कूलों का जिक्र किया है, जिन्होंने कभी दाखिला तक नही लिया. जब सीबीआई से यह पूछा गया था क्या उम्मीदवारों को योग्य दिखाने के लिए जालसाजी की गई थी, जिसपर सीबीआई के वकील ने कहा था कि हां, नौकरियों के लिए आवेदन करते समय यह दिखाना जरूरी है कि व्यक्ति ने कम से कम आठवीं कक्षा पास की है.
60 फीसदी सस्ती दर पर बेची गई जमीन
इसके अलावा सीबीआई ने जाली प्रमाण पत्र तैयार करने वाले स्कूल के अस्तित्व पर भी सवाल उठाया है. जांच एजेंसी ने अदालत में दावा किया गया लालू प्रसाद यादव के परिवार को बाजार की तुलना में 60 फीसदी सस्ती दर पर जमीन के टुकड़े बेचे गए थे और यह लेनदेन नकद में हुआ था.
सीबीआई के वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि इस मामले में लालू प्रसाद यादव और लोक सेवकों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी मिली हुई है. आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद है.
बता दें कि सीबीआई का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव के रेलमंत्री रहने के दौरान सेंट्रल रेलवे में ग्रुप-डी के पदों पर नियुक्तियों के बदले में लालू और उनके परिवार को सस्ते दामों में जमीन ली थी.एजेंसी ने इस मामले में 102 लोगों को आरोपी बनाया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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