जस्टिस बिंदल ने ये बात ऑल इंडिया सीनियर लॉयर्स एसोसिएशन के कार्यक्रम में कही है. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के कुछ युवा वकील एआई का इस्तेमाल करके कोर्ट के फर्जी फैसले खोजकर अदालत में पेश कर रहे हैं. जस्टिस बिंदल ने कहा कि यह समस्या हमारी न्याय व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन रही है और इसे रोकना बेहद जरूरी है.
सीनियर वकीलों की भूमिका अहम
जस्टिस बिंदल ने कहा कि वरिष्ठ अधिववताओं की यह जिम्मेदारी है कि वे युवा वकीलों को मार्गदर्शन दें और उन्हें प्रशिक्षित करें. लोग कहते हैं और जज बहुत काम करते हैं, लेकिन इसके पीछे युवा वकीलों की रिसर्च और सीनियर वकीलों की दलीलें होती हैं. एआई के इस्तेमाल की बढ़ती प्रवृति को खतरे की घंटी बताते हुए जस्टिस बिंदल ने कहा कि एआई पर बिना सोचे-समझे निर्भरता न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को खतरे में डाल सकती है.
लॉ स्कूलों को लेना होगा कदम
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ वकीलों को आगे आकर युवा अधिववताओं को इन खतरों के प्रति जागरूक करना चाहिए. उन्होंने वकीलों कहा कि एआई टूल्स को बस एक सहायक की तरह इस्तेमाल करें, न कि पूरी तरह उन पर निर्भर हों. उन्होंने यह भी कहा कि बार काउंसिल और लॉ स्कूलों से गुजारिश की कि युवा वकीलों को एआई के सही और गलत इस्तेमाल के बारे में ट्रेनिंग दें. इससे उनकी प्रैक्टिस बेहतर होगी और कोर्ट में गलत जानकारी पेश करने की समस्या भी कम होगी.
वही जस्टिस निलय वी. अंजारिया ने कहा सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश होना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. यह उत्तरदायित्व केवल स्वयं के प्रति नही, बल्कि संस्था और समाज के प्रति भी है.
भारत एक्सप्रेस
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