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कांवड़ यात्रा में दुकानों पर QR कोड लगाने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी कर मांगा जवाब, जानें पूरा मामला

Kanwar Yatra 2025: सुप्रीम कोर्ट ने कांवड़ यात्रा के दौरान दुकानों पर QR कोड लगाने के उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश पर नोटिस जारी किया. याचिकाकर्ताओं ने इसे अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लंघन बताया। कोर्ट 22 जुलाई को सुनवाई करेगा.

Kanwar Yatra 2025: कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. साथ ही कोर्ट ने याचिका को लंबित याचिका के साथ टैग कर दिया है. जस्टिस एम. एम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच 22 जुलाई को सुनवाई करेगा.

मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि नई याचिका दाखिल की गई है. जिसपर जवाब दाखिल करने के लिए 2 सप्ताह का समय चाहिए. यह याचिका दुकानों पर QR कोड़ लगाने के आदेश के खिलाफ है. इन QR कोड़ को स्कैन करके दुकान मालिकों के नाम पता चल सकते है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार का यह आदेश पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है.

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने दिया था रोक का आदेश

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार को ऐसा ही आदेश लागू करने से रोक दिया था. उस आदेश में कहा गया था कि दुकानदारों को सिर्फ यह बताना होगा कि वे क्या खाना बेच रहे हैं. उन्हें अपना और अपने कर्मचारियों का नाम बताने की जरूरत नहीं है. यह याचिका मोहम्मद अहमद की ओर से वकील नरेंद्र मिश्रा ने दायर की है.

याचिका में कहा गया है कि धार्मिक संगठनों की एक समुदाय के लोगों के खिलाफ की जा रही गतिविधियां गैर कानूनी हैं. यह सीधे तौर पर अनुच्छेद 19 (कोई भी व्यवसाय, व्यापार या कारोबार करने की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा) का उल्लंघन है.

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के आदेश पर रोक लगा दिया था. इस साल यूपी सरकार के बजाए कुछ हिन्दू संगठनों ने कांवड़ यात्रा के दौरान रास्ते में आने वाली दुकान, ढाबा व रेहड़ी-पटरी मालिकों की पहचान को लेकर मुहिम चला रखा है. जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की गई है. याचिका में इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्देश उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और मध्य प्रदेश सरकार को जारी करने की मांग की गई है.

सरकार ने तनाव की घटनाओं का हवाला दिया

बता दें कि पिछले साल भी यह  मुद्दा उठा था. जिसको लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दिया था. कोर्ट ने कहा था कि हमारा आदेश साफ है. अगर कोई अपनी मर्जी से दुकान के बाहर अपना नाम लिखना चाहता है तो हमने उसे रोका नहीं है. हमारा आदेश था कि नाम लिखने के लिए मज़बूर नहीं किया जा सकता.

दिल्ली के वकील ने कहा था कि हमने कांवड़ मार्गो पर नेमप्लेट लगाने को लेकर कोई आदेश पारित नही किया है. कावंड़ यात्रा में सालाना 4.07 करोड़ से अधिक कांवरिया भाग लेते है. उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक, वह किसी भी धर्म के लोगों की धार्मिक भावनाओं की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है.

यूपी सरकार की तरफ से पेश वकील ने कहा था कि पिछली घटनाओं से पता चला है कि बेचे जा रहे भोजन के प्रकार के बारे में गलतफहमी के कारण कई बार तनाव और अशांति पैदा हुई है. इन सबसे बचने के लिए प्लेट लगाने एक बेहतर उपाय है. यूपी सरकार ने कहा था कि वह मांसाहारी भोजन की बिक्री पर प्रतिबंध को छोड़कर, बाकी अन्य दुकानदार पहले की तरह अपना बिजनेस करने को स्वतंत्र है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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