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कपूर खानदान का ‘प्रॉपर्टी वॉर’: पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ सुलझाएंगे विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने दी परिवार को नसीहत

सुप्रीम कोर्ट ने कपूर परिवार के संपत्ति विवाद को सुलझाने के लिए पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया है. 80 वर्षीय रानी कपूर ने अपनी बहू और दिवंगत बेटे पर धोखाधड़ी से ट्रस्ट बनाकर संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया है.

Kapoor Property Dispute Supreme Court appoints former CJI DY Chandrachud as mediator

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Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत संजय कपूर की मां रानी कपूर की ओर से दायर याचिका पर बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने संपत्ति विवाद मामले को सभी पक्षों की सहमति के बाद मध्यस्थता के लिए भेज दिया है. कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचुड़ को नियुक्त किया है.

आरके ट्रस्ट तक सीमित मध्यस्थता

कोर्ट ने कहा मध्यस्थता की भूमिका निभाने वाले पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचुड़ को फीस सभी पक्ष मिलकर देंगे. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने ये फैसला दिया है. कोर्ट अगस्त के पहले सप्ताह में मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता केवल आरके ट्रस्ट तक सीमित है, दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की वसीयत इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है.

कोर्ट ने आगे कहा कि मामले को और उलझाने की जरूरत नही है. जस्टिस पारदीवाला ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पारिवारिक विवादों का समाधान परिवार के भीतर ही होना चाहिए और इसे दूसरों के मनोरंजन का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए. अदालत ने परिवार के सभी सदस्यों को मीडिया से बात करने और सोशल मीडिया पर मामले से संबंधित जानकारी पोस्ट करने से बचने की सलाह दी है.

लंबा खिचेगा मामला: कोर्ट की टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान रानी कपूर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान के कहा कि उन्हें राजोकरी स्थित घर में प्रवेश से नहीं रोका जाना चाहिए. इसपर प्रिया कपूर ने कहा कि रानी कपूर का स्वागत है और उन्हें किसी ने नहीं रोका है. पिछली सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि ये मामला लंबा खिच सकता है.

याचिकाकर्ता की उम्र 80 साल है. इसलिए दोनों पक्षों को आपसी सहमति से विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता मध्यस्थता का रास्ता अपनाना चाहिए. कोर्ट ने कहा था कि मामले में मेरिट्स के आधार पर सुनवाई होगी. लेकिन साथ भी मध्यस्थता को प्रोत्साहित किया जाएगा. जस्टिस पारदीवाला ने कहा था कि आप सब क्यों लड़ रहे है? ये आपके मुवक्किल के लड़ने के उम्र नही है? एक बार हमेशा मध्यस्थता का रास्ता अपनाए. शुरू से आखिर तक वरना ये सब बेकार है.

कैसे शुरू हुआ विवाद?

ये सारा विवाद रानी कपूर द्वारा दायर मुकदमे से शुरू हुआ है, जिसमें उन्होंने रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट के गठन को चुनौती दी है. उन्होंने आरोप लगाया है कि इस ट्रस्ट के गठन धोखाधड़ी से किया गया था और इसका इस्तेमाल उनकी पूरी संपत्ति, जिसमें सोना ग्रुप की कंपनियों पर उनका नियंत्रण भी शामिल है, इनसे छीनने के लिए किया गया.

दायर याचिका के मुताबिक 2017 में जब उन्हें स्टोक आया, तो उनके दिवंगत बेटे संजय कपूर और उनकी पत्नी प्रिया कपूर ने उनकी शारिरिक स्थिति और उनके भरोसे का फायदा उठाया. आरोप है कि उन्होंने बिना पूरी जानकारी और सहमति के उनकी संपत्ति को फैमिली ट्रस्ट में ट्रांसफर कर दिया. उन्होंने ये भी कहा कि प्रशासनिक सुविधा के बहाने उनसे कई दस्तावेजो पर, जिनमें सादे कागज भी शामिल थे, दस्तखत कराए गए.

प्रतिवादियों के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा की मांग

रानी कपूर द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रिया कपूर ने धोखाधड़ी से आर के फैमिली ट्रस्ट/रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट के गठन किया. रानी कपूर ने ट्रस्ट को शून्य और अमान्य घोषित करने की मांग की है. रानी कपूर ने प्रतिवादियों के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की है, ताकि वे किसी भी प्रकार से आरके फैमिली ट्रस्ट का उपयोग या उसके आधार पर कोई कार्रवाई न कर सकें.

इसके साथ ही ट्रस्ट की स्थापना से अब तक की है, ताकि वे किसी भी प्रकार से आरके फैमिली ट्रस्ट का उपयोग या उसके आधार पर कोई कार्रवाई न कर सकें. इसके साथ ही ट्रस्ट की स्थापना से अब तक कि लेखा-जोखा की भी मांग की है.

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-भारत एक्सप्रेस



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