दिल्ली शराब नीति से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई के दौरान आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में 2:40 बजे पेश हुए. उन्होंने कोर्ट से कहा कि इस मामले में वो अतिरिक्त हलफनामा दाखिल किए है. लिहाजा कोर्ट उसे रिकॉर्ड पर लें.
इस दौरान सीबीआई की ओर से कोर्ट में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि इसी तरह की मांग को पहले ही मुख्य न्यायाधीश की बेंच खारिज कर चुकी है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोर्ट इसे सुनना चाहे तो उन्हें कोई आपत्ति नही है. एसजी मेहता ने यह भी कहा कि केजरीवाल के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेने में कोई दिक्कत नही है, लेकिन उसके बाद हमें भी जवाब दाखिल करने का मौका मिलना चाहिए. इसपर केजरीवाल ने कहा कि मुझे भी जवाबी जवाब दाखिल करने के लिए दोबारा मौका दिया जाए.
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि इस मामले में फैसला सुरक्षित हो चुका है, लेकिन हम हलफनामे को रिकॉर्ड पर ले रहे है. केजरीवाल ने अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर जज से इस केस से अलग हो जाने की मांग की है. दाखिल अतिरिक्त हलफनामें में केजरीवाल ने जज के दोनों बच्चों का मुद्दा उठाते हुए गंभीर सवाल खड़े किए है.
आरएसएस से जुड़े कार्यक्रम में भागीदारी का आरोप
केजरीवाल का दावा है कि जस्टिस स्वर्णकांता ने दोनों बच्चे बेटे ईशान शर्मा और बेटी शंभवी शर्मा दोनों केंद्र सरकार के पैनल पर है और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अधीन काम करते है. एसजी मेहता उनके बच्चों को केस सौंपते है. एसजी मेहता सीबीआई की तरफ से इस केस में पेश होते है. ऐसे में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा तुषार मेहता के खिलाफ आदेश कैसे जारी कर पाएंगी? इससे पहले 13 अप्रैल को मामले की सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने खुद जिरह करते हुए कहा था कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में चार बार शामिल हो चुकी हैं.
इसलिए हितों के टकराव को देखते हुए जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को इस केस से खुद को अलग कर लेना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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