गैंगेस्टर लॉरेंस बिश्नोई को दिल्ली के साकेत कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. साकेत कोर्ट ने एक करोड़ रुपए की फिरौती के मामले में लॉरेंस बिश्नोई और दो अन्य को सबूतों के आभाव में बरी कर दिया है.
बयानों के अलावा कोई सबूत नहीं
कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ बयानों के अलावा कोई सबूत पेश नहीं किया गया, जो आरोपों को साबित करता हो. चीफ ज्युडिशयल मजिस्ट्रेट नूपुर गुप्ता ने लॉरेंस बिश्नोई सहित तीनों को बरी कर दिया है. रमन दीप सिंह की शिकायत पर अप्रैल 2023 में दिल्ली के सन लाइट कॉलिनी पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज किया गया था.
शिकायत में कहा गया था कि 23-24 अप्रैल 2023 की रात को उन्हें एक अनजान नंबर से 1 करोड़ रुपये की मांग करते हुए कॉल आने लगा है. दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच ने इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई, हरेन सरपदादिया और आशीष शर्मा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था.
1 करोड़ की फिरौती मांगने का आरोप
अदालत ने आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन का ऐसा कोई आरोप नहीं है कि आरोपी को कोई फिरौती दी गई थी. फिरौती के जुर्म के लिए डर के कारण रकम की डिलीवरी होनी जरूरी है. कोर्ट ने ये भी कहा कि बिना फिरौती की डिलीवरी के केवल मांग या धमकी देना काफी नहीं हैं. शिकायतकर्ता ने एक करोड़ रुपए की फिरौती मांगने का आरोप लगाया था.
वहीं, दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच ने जांच के बाद चार आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 386 और धारा 387 के साथ-साथ आईपीसी की धारा 120बी के तहत चार्जशीट दाखिल किया था.
पुलिस आरोपों को साबित करने में विफल
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने दलील देते हुए कहा कि प्रॉसिक्यूशन ने सभी जरूरी बातें रिकॉर्ड पर लाने में कामयाबी हासिल की है, जिससे पहली नजर में आरोपियों की जिम्मेदारी साबित होती है.
बता दें कि कोर्ट ने पहले संज्ञान लेते हुए कहा था कि रिकॉर्ड में यह दिखाने के लिए काफी सबूत है कि आरोपी लॉरेंस बिश्नोई, संपत नेहरा और हरेन ने धारा 386 और 387 के साथ 120बी आईपीसी के तहत सजा वाले अपराध किए है. लेकिन ट्रायल के दायर पुलिस आरोपों को साबित करने में विफल रही.
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-भारत एक्सप्रेस
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