Bharat Express DD Free Dish

बलात्कार में सजा, मर्डर में बरी! पत्रकार हत्याकांड मामले में राम रहीम को हाईकोर्ट से राहत

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बरी कर दिया है. 2019 में मिली उम्रकैद की सजा को कोर्ट ने रद्द किया, हालांकि बलात्कार मामले में सजा के चलते वे जेल में ही रहेंगे.

Ram Rahim got relief in journalist murder case from high court

शनिवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में अदालत ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम को बरी कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश शील नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की बेंच ने सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा साल 2019 में सुनाए गए उम्रकैद के फैसले को पूरी तरह पलट दिया.

क्या था पूरा मामला?

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या का यह मामला करीब 22 साल पुराना है. साल 2019 में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम और तीन अन्य को इस हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने का दोषी माना था. तब अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी. राम रहीम ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सबसे बड़ा पेंच उन गोलियों और सबूतों को लेकर फंसा, जिनका इस्तेमाल इस वारदात में कथित तौर पर किया गया था. साक्ष्यों की दोबारा और बारीकी से जांच करने के बाद बेंच इस नतीजे पर पहुंची कि राम रहीम के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके. हालांकि, कोर्ट ने इसी मामले में दो अन्य सह-आरोपियों की अपील को खारिज कर दिया है, यानी उनके खिलाफ सजा बरकरार रहेगी.

बरी होने के बाद भी नहीं सलाखें?

भले ही हत्या के इस संगीन मामले में राम रहीम को राहत मिल गई हो, लेकिन उनके जेल की सलाखों से बाहर आने का रास्ता अभी बंद है. इसकी वजह यह है कि वे पहले से ही साध्वियों के यौन शोषण (बलात्कार) के मामले में सजा काट रहे हैं. कानूनन, एक मामले में बरी होने का मतलब यह नहीं है कि दूसरे मामलों की सजा खत्म हो गई हो. राम रहीम फिलहाल रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं और अक्सर पैरोल या फरलो पर बाहर आने को लेकर चर्चा में रहते हैं.

16 साल चली कानूनी लड़ाई

रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड न्याय की एक लंबी लड़ाई की मिसाल रहा है. साल 2002 में सिरसा के निडर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने अपने अखबार ‘पूरा सच’ में डेरा सच्चा सौदा के भीतर हो रहे काले कारनामों और साध्वियों के शोषण की खबर छापी थी.

इसके कुछ ही समय बाद उन पर कातिलाना हमला हुआ और बाद में उनकी मृत्यु हो गई. उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने इस लंबी कानूनी लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया. साल 2019 में जब फैसला आया था, तब इसे न्याय की बड़ी जीत माना गया था, लेकिन अब हाईकोर्ट के इस ताजा मोड़ ने मामले को एक नई दिशा दे दी है.

ये भी पढ़ें: दिल्ली हाई कोर्ट ने शेक्सपियर की ‘मर्सी’ का हवाला देते हुए हत्या के प्रयास के मामले को किया रद्द

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read