ऑनलाइन गेमिंग पर पाबंदी लगाने की मांग काफी दिनों से चल रही थी. कहा जा रहा था कि ऑनलाइन गेमिंग के चलते युवा बर्बाद हो रहे है. कई युवाओं ने आत्महत्या तक कर ली है. अब केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन और रेग्युलेश) बिल 2025 को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है. अब यह कानून बन गया है.
इस कानून के तहत सभी ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवाओं पर प्रतिबंध लगेगा. नए कानून में मनी गेम का विज्ञापन करने पर दो साल तक कि कैद और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लगेगा. जबकि मनी गेम से संबंधित वित्तीय लेनदेन को बढ़ावा देने पर तीन साल तक कि कैद और एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. जबकि बार-बार अपराध करने पर तीन से पांच साल की कैद और दो करोड़ रुपए तक जुर्माना लगाया जाएगा.
गैर जमानती बनाने की मांग की गई
यह बात महत्वपूर्ण है कि विधेयक में प्रमुख धाराओं के तहत अपराधों को संज्ञेय और गैर जमानती बनाने की मांग की गई है. इस विधेयक में ई-स्पोर्ट्स, शैक्षणिक खेल और सामाजिक खेल सहित ऑनलाइन खेल क्षेत्र को बढ़ावा देने, उसे विनियमित करने और इसके विकास तथा विनियमन के लिए एक प्राधिकरण की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है.
इसके अलावा विधेयक में किसी कंप्यूटर, मोबाइल उपकरण या इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन मनी गेम के प्रस्ताव, संचालन, सरलीकरण, विज्ञापन, प्रचार और भागीदारी को निषिद्ध किया गया है. उत्तराखंड हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस लोकपाल सिंह की माने तो सरकार द्वारा लाए गए कानून के बाद विदेशी कंपनियां भारत में ऑनलाइन गेमिंग का संचालन नही कर सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह कि चीजों पर लगाम लगनी चाहिए, ताकि समाज और युवा पीढ़ी इसके गिरफ्त में न आ जाए.
कानून पर हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में हुई बहस
सुप्रीम कोर्ट के वकील बिराग गुप्ता की माने तो यह राज्यों का विषय है. कई राज्यों ने तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना ने कानून बनाया था और उस कानून पर हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में बहस भी हुई है. यूएन का सेक्रेटरी जनरल ने कहा था जलवायु परिवर्तन के बाद ऑनलाइन गेमिंग दूसरी सबसे बड़ीमहामारी है. टैक्स चोरी करते है.
युवा पीढ़ी के साथ समाज विखंडित हो रहा है. इस कानून में मनी गेमिंग पर जहां प्रतिबंध लगाने की बात कही गई ई स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग पर बढ़ावा देने की बात है. इनका मानना है कि मनी गेमिंग पर प्रतिबंध लगाने के लिए कोई ठोस कानून नही है. इन्होंने यह भी कहा कि यह कानून विदेशी कंपनियों पर कैसे प्रभावी होगी.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कानून लाने से पहले राज्यों से राय मशविरा नही की है. जबकि यह राज्य का विषय है. जबकि वकील और थिंक टैंक सीएएससी की एसोसियेट सुश्री शौर्या तिवारी की माने तो बेरोजगार युवा रील बनाने के साथ ऑनलाइन गेमिंग में अपना भविष्य खोज रहे हैं. लेकिन इस चक्कर में अधिकांश युवा अपनी जमापूंजी गवां रहे हैं. बिल की प्रस्तावना और आईटी मंत्री के भाषण में भी ऑनलाइन गेम के सामाजिक बुराइयों का पक्ष उजागर हुआ है.
18 साल से कम उम्र के बच्चे नहीं कर सकते वैध एग्रीमेंट
संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव ने वर्ल्ड इकॉनामिक फोरम में ऑनलाइन गेम को जलवायु परिवर्तन के बाद दूसरी बड़ी महामारी बताया है. भारत के कानून के अनुसार 18 साल से कम उम्र के बच्चे वैध एग्रीमेंट नहीं कर सकते. इसलिए नाबालिग बच्चों को किसी भी तरह के गेम की लत से मुक्त रखने के लिए कानून में जरुरी प्रावधान किये जाने चाहिए.
एल्गोरिदम के माध्यम से गेमिंग कम्पनियां लोगों की गाढ़ी कमाई को लूट रही हैं. धोखाधड़ी के मामलों को रोकने के लिए आईटी इंटरमीडियरी नियमों के अनुसार सभी गेमिंग कम्पनियों में शिकायत निवारण का पुख्ता प्रबंधन करने की जरुरत है. ऐसा करने से गेमिंग की लत और बुराईयों से मुक्ति के साथ बेहतर डेमोग्राफी से विकसित भारत का सपना सही अर्थों में साकार हो सकेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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