मद्रास हाईकोर्ट ने चुनावी याचिकाओं के निपटारे में होने वाली देरी पर चिंता व्यक्त की है. कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसे मामलों में समय पर फैसला नहीं हुआ तो यह लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर कर सकता है. इसके साथ ही कोर्ट ने 2016-2021 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के राधापुरम विधानसभा क्षेत्र का परिणाम बदलते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और द्रमुक (DMK) नेता अप्पावु को विजेता घोषित कर दिया है.
पुनर्गणना में AIADMK उम्मीदवार की हार, अप्पावु जीते
अदालत ने पाया कि डाक मतपत्रों (पोस्टल बैलट) की पुनर्गणना के बाद अप्पावु ने अन्नाद्रमुक (AIADMK) उम्मीदवार आईएस इनबादुराई को 103 वोटों से हराया था. जस्टिस जी. जयचंद्रन ने यहां तक कहा कि अगर चुनाव याचिकाओं के शीघ्र निस्तारण को लेकर कानून में तय व्यवस्था का पालन नहीं किया गया तो भारत भी उन देशों की राह पर जा सकता है, जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था धीरे-धीरे कमजोर होकर निरंकुशता में बदल गई.
जज की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई में हुई दुर्भाग्यपूर्ण देरी का जिक्र करते हुए, जस्टिस जी. जयचंद्रन ने इस बात पर प्रकाश डाला कि अब अदालतें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत प्रदान किए गए शीघ्र सुनवाई के आदेश का पालन नहीं करती हैं, तो यह लोकतंत्र और वयस्क मताधिकार की सच्ची भावना को कमजोर करता है. अदालत ने यह भी कहा है कि यह मामला न्याय व्यवस्था की विफलता का उदाहरण है, जहां एक ऐसे व्यक्ति ने विधायक के रूप में कार्य किया जिसे विधिवत निर्वाचित नहीं माना जा सकता था. कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सुप्रीम कोर्ट में 2019 से लंबित विशेष अनुमति याचिका (SLP) का 6 वर्षों तक निस्तारण न होना दुर्भाग्यपूर्ण रहा.
क्या था मुख्य विवाद और सुप्रीम कोर्ट का रुख?
मुख्य विवाद इस बात पर था कि सरकारी मिडिल स्कूल के हेडमास्टर द्वारा प्रमाणित पोस्टल बैलट को स्वीकार किया जा सकता है या नहीं. साल 2019 में मद्रास हाईकोर्ट ने यह माना था कि हेडमास्टरों को राजपत्रित अधिकारी (गैजेटेड ऑफिसर) की तरह इसे सत्यापित करने का अधिकार है और वोटों की गिनती के आदेश दिए गए थे. हालांकि, इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी, जिसने मतगणना के नतीजों की घोषणा पर रोक लगा दी थी और साल 2026 में बिना किसी ठोस फैसले के इस मामले को वापस हाई कोर्ट को सौंप दिया था.
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