-सुप्रीम कोर्ट
Supreme Court: टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 1 अक्टूबर को सुनवाई करेगा. महुआ मोइत्रा की ओर से दायर याचिका में पश्चिम बंगाल के नदिया में सर्किट हाउस खाली करने के आदेश को चुनौती दी गई है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच से याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकरनारायण ने मामले में तुरंत सुनवाई की मांग की.
सॉलिसिटर जनरल की आपत्ति और महुआ मोइत्रा का दावा
वही सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पूछा कि क्या सांसदों के व्यक्तिगत मुद्दों को सीघे सुप्रीम कोर्ट के सामने उठाया जा रहा है? उन्होंने कहा कि तथ्यों के मामले में भी गलत बातें कही गई हैं. कल कोई और भी आ सकता है और कह सकता है कि मेरी योजनाएं लागू नहीं की गई. महुआ मोइत्रा के अनुसार, वह 14 अगस्त को शाम को नदिया सर्किट हाउस पहुची. उन्हें उनका सामान्य कमरा दिया गया था और कमरा पहले से तैयार था.
शाम सात बजे उन्हें चाय और रात 9:20 बजे कमरे खाली डिनर भी दिया गया. लेकिन उसके कुछ ही देर बाद जिलाधकारी ने सर्किट हाउस खाली करने का निर्देश दिया. इससे पहले महुआ मोइत्रा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष विशेषाधिकार नोटिस दिया था.
अधिकारियों पर आरोप और लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत
मोइत्रा ने तीन सीनियर अधिकारियों पर प्रोटोकॉल के गंभीर उल्लंघन और अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाया है. मोइत्रा ने कहा कि यह कार्रवाई उनके संसदीय दायित्वों को निभाने से रोकने के लिए किए जा रहे एक बड़े प्रयास का हिस्सा है. बता दें कि कई विपक्षी पार्टी के नेता अब मोइत्रा के समर्थन में आ गए है.
टीएमसी के राज्य सभा नेता डेरेक ओब्रायन ने पश्चिम बंगाल में हुई घटनाओं पर सवाल उठाए, जबकि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने पूछा कि क्या यह घटना संसदीय विशेषाधिकार का उल्लंघन है. सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने भी इस घटना की निंदा की और देर रात निकाले गए बेदखली के आदेश को अस्वीकार्य और निंदनीय बताते हुए लोकसभा स्पीकर से इसमें दखल देने की मांग की.
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-भारत एक्सप्रेस
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