Bharat Express DD Free Dish

मल्लिकार्जुन खड़गे विवादित बयान मामला: राऊज एवेन्यू कोर्ट में 6 अगस्त को अगली सुनवाई, कोर्ट ने मांगा भाषण का वीडियो लिंक

साल 2023 में बीजेपी और आरएसएस के खिलाफ दिए गए कथित विवादित बयान के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की पुनरीक्षण याचिका पर राऊज एवेन्यू कोर्ट 6 अगस्त को सुनवाई करेगा. कोर्ट ने शिकायतकर्ता से भाषण का वीडियो लिंक मांगा है.

Kharge RSS Remark Case Rouse Avenue Court To Hear On August 6
Edited by Vaibhav Gupta

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा 2023 कर्नाटक विधानसभा के दौरान बीजेपी और आरएसएस को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में राऊज एवेन्यु कोर्ट 6 अगस्त को सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शिकायतकर्ता को भाषण का वीडियो लिंक जमा करने का निर्देश दिया है. इससे पहले कोर्ट ने खड़गे को नोटिस भेजा था.

पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करने का अधिकार नहीं

खड़गे ने तीस हजारी कोर्ट के मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करने के कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए है. खड़गे के वकील ने कहा कि विशेष अदालत के पास पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करने का अधिकार नहीं है. खड़गे ने यह भी कहा कि पुनरीक्षण के लिए अधिकार क्षेत्र तीस हजारी कोर्ट, नई दिल्ली के प्रधान एवं सत्र न्यायाधीश का है, न कि राऊज एवेन्यु कोर्ट के पास.

दायर याचिका में 11 नवंबर 2025 को तीस हजारी कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को रद्द करने की मांग की गई है. तीस हजारी कोर्ट ने खड़गे के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने याचिकाकर्ता की उस मांग को भी खारिज कर दिया था, जिसमें संज्ञान लेने की मांग की गई थी.

क्या था आरोप?

यह शिकायत आरएसएस के सदस्य की ओर से दायर की गई थी. जिसमें आरोप लगाया गया था कि खड़गे ने अप्रैल 2023 में कर्नाटक के नरेगल में एक चुनावी रैली के दौरान कथित तौर पर नफरत फैलाने वाला भाषण दिया था, और पीएम मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि खड़गे द्वारा दिया गया बयान कोर्ट की नजर में किसी समुदाय या धर्म को निशाना बनाकर नही दिया गया था, बल्कि यह राजनीतिक और सैद्धांतिक विचार का हिस्सा था. कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि इस मामले में हिंसा भड़काने का मामला नहीं बनता है.

कोर्ट ने क्या कहा था?

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में धारा 156 (3) सीआरपीसी के तहत जांच की कोई जरूरत नहीं है. कोर्ट ने कहा था कि शिकायतकर्ता को समन-पूर्व जारी साक्ष्य पेश करने की स्वतंत्रता है. कोर्ट ने शिकायतकर्ता से कहा था कि बाद में अगर उन्हें लगता है कि किसी विवादित तथ्यों से संबंधित जांच की जरूरत होती है तो धारा 202 सीआरपीसी के प्रावधान का सहारा लिया जा सकता है.

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अपना रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा था कि विवादित बयान देने की घटना कर्नाटक का है, इसलिए दिल्ली में इसको लेकर कोई मामला नहीं बनता है. क्योंकि यह क्षेत्राधिकार से बाहर है. वहीं, शिकायतकर्ता के वकील ने कहा था कि यह भड़काऊ बयान देने का मामला है और यह सोशल मीडिया और कई माध्यमों से पूरे देश मे फैल गया है. इसलिए इसको लेकर कही भी प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है.

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि वकील रविंद्र गुप्ता ने मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 ए, 153 बी, 295 ए, 120बी और 34 के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी. 27 अप्रैल 2023 को कर्नाटक के एक जनसभा में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विवादित बयान दिया था. फिर दूसरे दिन के जनसभा में उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए खड़गे ने कहा था कि उन्होंने जहरीला वाला बयान भाजपा व आरएसएस को लेकर दिया था. शिकायतकर्ता ने कहा था कि वह वर्षो से आरएसएस के जुड़ा रहा है और खड़गे के बयान से उन्हें काफी चोट पहुची है.

ये भी पढ़ें: Shraddha Murder Case: आफताब की एमए परीक्षा के चलते टली 20 जुलाई की सुनवाई, साकेत कोर्ट ने मंजूर की अर्जी

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read