नीट-पीजी 2025-26 की कट-ऑफ घटाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया है. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने यह आदेश दिए है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे गंभीर है.
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी चिंता शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर है. आपको हमें यह साबित करना होगा कि कट-ऑफ को इतना कम करना, लगभग शून्य या न के बराबर कर देना. कोर्ट ने पूछा कि क्या प्रभाव डालेगा? वही केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नीट-पीजी कट-ऑफ में कमी से डॉक्टरों की योग्यता पर कोई असर नहीं पड़ेगा. कोर्ट ने शून्य कट-ऑफ का बचाव करते हुए कहा कि नीट-पीजी नियुन्तम योग्यता को प्रमाणित नही करता है, जो कि एमबीबीएस योग्यता द्वारा स्थापित की जाती है, बल्कि यह सीमित स्नातकोत्तर सीटों के आवंटन के लिए केवल एक छंटाई तंत्र है.
कट-ऑफ घटाने से डॉक्टरों की योग्यता प्रभावित नहीं होगी- केंद्र
सरकार द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है कि नीट-पीजी स्कोर परीक्षा संरचना पर निर्भर करता हैं, जिन्हें नैदानिक अक्षमता का निर्धारणक नही माना जा सकता है. केंद्र सरकार द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने संभावित खाली सीटों की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रतिशत कट-ऑफ कम करने का निर्णय लिया है. इसमें कहा गया है कि इस निर्णय से तीसरे दौर के लिए अतिरिक्त 1,00,054 उम्मीदवार पात्र हो जाएंगे, जिससे कुल पात्र उम्मीदवारों की संख्या बढ़कर 2,28,170 हो जाएगी.
NBEMS की नोटिफिकेशन को चुनौती
दायर जनहित याचिका में NBEMS द्वारा 13 जनवरी को जारी अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई है. साथ ही न्यूनतम क्वालिफाइंग के लिए दिशा निर्देश जारी करने की मांग की गई है. यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील सत्यम सिंह राजपूत, वकील आदर्श सिंह और एओआर नीमा के माध्यम से समाजिक कार्यकर्ता एवं किसान नेता हरिशरण देवगन, डॉक्टर सौरव कुमार, डॉक्टर लक्ष्य मित्तल और डॉक्टर आकाश ने दायर की है. दायर याचिका में कहा गया है कि पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा में न्यूनतम क्वालिफाइंग मानकों को इस तरह घटाना मनमाना, असंवैधानिक और अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन है.
याचिका में यह भी कहा गया है कि इस फैसले से रोगियों की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा पेशे की साख को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. उन्होंने कहा है कि पोस्टग्रेजुएट स्तर पर मेरिट से समझौता करना न केवल स्थापित न्यायिक सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम 2019 के वैधानिक प्रावधानों का भी उल्लंघन है.
NBEMS द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक सामान्य वर्ग के लिए नीट पीजी का कट ऑफ 50 प्रतिशत से घटाकर सात प्रतिशत, वही आरक्षित वर्ग के लिए इसे 40 प्रतिशत से घटाकर शून्य प्रतिशत कर दिया है. ऐसे में अब नीट पीजी सीट ओ प्रतिशत वाले अभ्यर्थियों को मिल सकेगा.
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