राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने जनकपुरी में पीने योग्य पानी की आपूर्ति नहीं करने पर दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की खिंचाई की है. कथित रूप से उस क्षेत्र के घरों में सीवेज-,मिश्रित पेयजल की आपूर्ति की जा रही थी. एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी तथा विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि शहर के लोगों को अनुपयुक्त पेयजल की आपूर्ति किया जाना बहुत गंभीर मामला है.
डीजेबी ने नहीं उठाया ठोस कदम
उसे नजरअंदाज करते हुए डीजेबी ने उसे ठीक करने के लिए तुरंत ठोस कदम नहीं उठाया. साथ ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने उसके पिछले आदेश के अनुसार पानी के नमूने की रिपोर्ट जल्द लेने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए. इस दशा में सीपीसीबी से पानी के नमूने एकत्र करने एवं नया रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है.
बिना सूचना दिए पुराने जगहों से जल के लिए जाए नमूने
एनजीटी ने कहा कि बिना डीजेबी के सूचना दिए 10 नए जगह एवं 10 पुराने जगहों से जल के नमूने के लिए जाए. इस नमूनों को जल्द विश्लेषण किया जाए जिससे पता चले कि फिकल कोलीफॉर्म और ई. कोलाई जैसे बैक्टीरिया है या नहीं. उसने डीजेबी की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए कहा कि उसने हलफनामा दाखिल कर बता दिया कि क्या कार्रवाई की गई है, लेकिन जब तक संबंधित क्षेत्र के लोगों को पीने योग्य पानी नहीं मिलता है तब तक यह नहीं कहा जा सकता कि डीजेबी ने पर्याप्त कदम उठाए है.
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एनजीटी 30 मई को करेगा अगली सुनवाई
एनजीटी ने इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने के लिए अगली सुनवाई के लिए 30 मई को मुख्य अभियंता से उपस्थित रहने को कहा है. एनजीटी रेजिडेंट वेलफेयर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है. याचिका में कहा गया है कि खराब पाइपलाइन की वजह से पीने के पानी में सीवेज मिल रहा है. उस वजह से लोग बीमार पड़ रहे हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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