Nitish Katara case: साल 2002 के बहुचर्चित नीतीश कटारा हत्याकांड मामले में दोषी विकास यादव को मिली राहत को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है. कोर्ट ने विकास यादव को मिली फरलो की अवधि को 10 दिन के लिए बढ़ा दिया है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने विकास यादव को 22 मई को शाम 5 बजे सरेंडर करने का आदेश दिया है. कोर्ट 21 जुलाई को मामले में अगली सुनवाई करेगा.
मामले की सुनवाई के दौरान विकास यादव की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि साढ़े 23 साल से जेल में बंद है. हालही में उनकी शादी हुई है. मामले की सुनवाई के दौरान नीलम कटारा की ओर से पेश वकील ने विकास यादव द्वारा फरलो की मांग का विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि विकास यादव की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है. तिहाड़ जेल प्रशासन ने विकास यादव को फरलो देने से इनकार कर दिया था.
तिहाड़ जेल प्रशासन ने विकास यादव को फरलो देने से किया था इनकार
अधिकारियों की रिपोर्ट के मुताबिक अस्वीकृति उसके आचरण के मूल्यांकन के बाद हुई, जिसे असंतोषजनक माना गया था. विकास यादव को सजा काटते हुए 23 साल से अधिक हो गए हैं. निचली अदालत और हाई कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ विकास और विशाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. जिसपर सुनवाई के बाद कोर्ट ने विकास और विशाल को आजीवन कारावास की सजा को 25 साल की सजा में तब्दील कर दिया था. 17 फरवरी 2002 को नीतीश कटारा की हत्या कर दी गई थी.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश कटारा हत्याकांड में विकास यादव और विशाल यादव को मौत की सजा देने से इंकार कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये मामला केवल हत्या का है न कि जघन्यतम अपराध का. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि इस मामले में आजीवन जेल में रखने की भी सजा नही दी जा सकती.
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-भारत एक्सप्रेस
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