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धौला कुंआ बीएमडब्ल्यू हादसा मामले में आरोपी गगनप्रीत कौर को पटियाला हाउस कोर्ट से राहत

धौला कुंआ बीएमडब्ल्यू हादसा मामले में तिहाड़ जेल में बंद गगनप्रीत कौर को पटियाला हाउस कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने गगनप्रीत कौर को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी है.

Edited by Vaibhav Gupta

धौला कुंआ बीएमडब्ल्यू हादसा मामले में तिहाड़ जेल में बंद गगनप्रीत कौर को पटियाला हाउस कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने गगनप्रीत कौर को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी है. ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास अंकित गर्ग ने एक लाख रुपए की निजी मुचलके और दो सियोरिटीज पर जमानत दे दिया है. साथ ही कोर्ट ने पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने गगनप्रीत को जांच में सहयोग करने को कहा है.

एम्बुलेंस में नहीं था फर्स्ट एड

कोर्ट ने कहा कि वो सबूतों के साथ छेड़छाड़ नही करेंगी और ना ही गवाहों को प्रभावित करेंगी. कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि कोर्ट के बिना अनुमति के देश छोड़कर नहीं जाएंगी. कोर्ट ने मौके पर मौजूद एम्बुलेंस को लेकर उठाए सवाल उठाते हुए कहा कि एम्बुलेंस का ड्राइवर घायलों को लेकर अस्पताल क्यों नहीं गया. कोर्ट ने उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं करने पर भी सवाल उठाया है. पुलिस ने कहा कि एम्बुलेंस में फर्स्ट एड नहीं था.

कोर्ट ने कहा उसके बावजूद घायल को अस्पताल पहुचाया जा सकता था. पीपी ने कोर्ट को बताया कि आरोपी बेहोश नही था. जमानत पर सुनवाई के दौरान सीसीटीवी फुटेज और दूसरे साक्ष्यों को देखने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. पिछली सुनवाई में दिल्ली पुलिस को सीसीटीवी फुटेज और दूसरे साक्ष्यों को पेश करने का निर्देश दिया था.

मंशा गलत नहीं थी- गगनप्रीत के वकील

मामले की सुनवाई के दौरान गगनप्रीत कौर की ओर से पेश वकील प्रदीप राणा ने कहा कि आरोपी की मंशा गलत नहीं थी. गगनप्रीत कौर ने वेंकटेश्वर अस्पताल को फोन किया, लेकिन किसी ने भी फोन नहीं उठाया, उन्होंने पीसीआर को भी फोन किया था. यहां तक कि आरोपी ने घायलों को न्यूलाइफ अस्पताल लेकर गई और अपने पिता को ईलाज के लिए जरूरी इंतजाम करने को कहा.

आरोपी के वकील ने एक सवाल उठाते हुए कहा, एफआईआर 10 घंटे की देरी से दर्ज की गई. पुलिस ने इतना समय क्यों लिया. उन्होंने यह भी कहा कि घटना के लिए 1:38-1:39 बजे पीसीआर कॉल की गई थी. आरोपी का कथित इरादा गलत समझा गया है. वह डॉक्टर नहीं है और उसे यह पता नहीं था कि मरीज को कितना समय बचा है? यह हत्या के अपराध का मामला नहीं है. वही स्पेशल पब्लिक प्रॉस्क्यूटर ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी की मंशा घायल को बचाने की नहीं, बल्कि खुद की कानूनी कार्यवाही से बचने की थी.

दिल्ली के धौला कुंआ इलाके में 14 सितंबर को हुए सड़क हादसे में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी नवजोत सिंह की मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई.

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-भारत एक्सप्रेस



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