सुप्रीम कोर्ट में यूपीएससी में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी), कंप्यूटर साइंस (सीएस) कंप्यूटर कोर्स से जुड़े प्रमुख कोर्सों को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (आईईएस) परीक्षा में विषय के रूप में शामिल करने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की गई है. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील गोपाल सिंह ने दायर की है. यह याचिका अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है.
यूपीएससी में उचित प्रतिनिधित्व न मिलने का आरोप
दायर याचिका में कहा गया है कि आईटी और सीएस की पढ़ाई करने वाले उम्मीदवारों को यूपीएससी की परीक्षा संरचना में उचित प्रतिनिधित्व नही दिया गया है. जबकि यह विषय आज के समय मे सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
याचिका में यह भी कहा गया है कि यह मामला उम्मीदवारों के अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) और अनुच्छेद 16 (समान अवसर का अधिकार) के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है. याचिका में कहा गया है कि उम्मीदवारों को अपने ही विषय को चुनने का विकल्प न देकर उन्हें असंबंधित विषय चुनने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे वे प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते है.
आईटी-सीएस की भूमिका अहम
याचिकाकर्ता का कहना है कि समय-समय पर यूपीएससी के राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुसार नए विषय जोड़े हैं, लेकिन अब तक आईटी और सीएस को शामिल नही किया गया है. जबकि छह क्षेत्र आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, डिजिटल गवर्नेंस, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और डेटा प्रबंधन के लिए अनिवार्य हो चुका है. याचिका में यह भी कहा गया है कि डिजिटल इंडिया साइबर सुरक्षा और स्मार्ट सिटीज जैसी सरकारी योजनाएं पूरी तरह तकनीकी विशेषता पर निर्भर है.
बता दें कि याचिकाकर्ता ने याचिका दायर करने से पहले यूपीएससी में भी आवेदन दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नही हुई , जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
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