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तलाक के बाद महिला का साझा घर पर अधिकार खत्म: दिल्ली हाईकोर्ट

तलाक को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया है कि अगर विवाह वैध तलाक की डिक्री से समाप्त हो चुका है, तो महिला को घरेलू हिंसा कानून की धारा 17 के तहत साझा घर में रहने का अधिकार नही है.

delhi high court

दिल्ली हाईकोर्ट.

Edited by Vaibhav Gupta

तलाक को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया है कि अगर विवाह वैध तलाक की डिक्री से समाप्त हो चुका है, तो महिला को घरेलू हिंसा कानून की धारा 17 के तहत साझा घर में रहने का अधिकार नही है.

कोर्ट ने कहा कि यह अधिकार तभी मान्य होगा, जब वह कोई अन्य वैधानिक हक साबित कर सके. जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैधनाथन शंकर की पीठ ने यह आदेश दिया है.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब विवाह तलाक डिक्री आपसी सहमति से खत्म हो जाता है, तो घरेलू संबंध भी समाप्त हो जाते हैं. परिणामस्वरूप निवास के अधिकार का आधार भी खत्म हो जाता है. दरअसल मामला एक बहु की अपील से जुड़ा था, जिसने अपनी सास के पक्ष में आए फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी. सास का निधन हो चुका था और संपत्ति उनकी बेटी के नाम वसीयत कर दी गई थी.

संपत्ति की खरीद व निर्माण में आर्थिक बहू का योगदान

बहू का दावा था कि यह घर उसका वैवाहिक निवास है और उसने संपत्ति की खरीद व निर्माण में आर्थिक योगदान दिया है. बता दें कि फैमली कोर्ट ने नवंबर 2019 की तलाक डिक्री के बाद साफ कहा था कि अब बहू का घर मे रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है.

हाई कोर्ट ने इस आदेश को बरकरार रखते हुए छह महीने में खाली करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आर्थिक योगदान देने से बहू को संपत्ति पर स्वामित्व अधिकार नही मिलता. कोर्ट ने कहा कि फैमली कोर्ट का निष्कर्ष साक्ष्यों और कानूनी सिंद्धान्तों के.आधार पर बिल्कुल तार्किक है.

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-भारत एक्सप्रेस



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