दिल्ली हाई कोर्ट ने बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम पर देशभर में किसी भी मस्जिद के निर्माण या नामकरण पर रोक लगाने की जनहित याचिका को खारिज कर दिया. पश्चिम बंगाल में न्यू बाबरी मस्जिद के निर्माण से राजनीतिक तनाव बढ़ा है. सुप्रीम कोर्ट ने पहले अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और वैकल्पिक मस्जिद भूमि देने के आदेश दिए थे. चलिए जानते है पूरा मामला:
याचिका का दावा
याचिकाकर्ता देवकीनंदन पांडेय की ओर से पेश वकील ने कहा कि बाबर के नाम पर धार्मिक स्थल का निर्माण गलत है. उन्होंने बाबर को आक्रमणकारी बताते हुए कहा कि हिंदुओं को गुलाम बनाने वाले ऐसे व्यक्ति के नाम पर मस्जिद नहीं बननी चाहिए और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो. पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बेलडांगा में न्यू बाबरी मस्जिद का निर्माण विधिवत शुरू हो गया.
इस मौके पर करीब 1200 मौलवी और बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग मौजूद थे. बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर इस कदम से राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ा.
सुप्रीम कोर्ट का पिछला आदेश
जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने अपनी पार्टी के माध्यम से आगामी विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा को चुनौती देने की घोषणा की. इससे पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ देखने को मिला. नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवादित भूमि मामले में राम मंदिर निर्माण की अनुमति दी थी. कोर्ट ने 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस को कानून का उल्लंघन बताया और अयोध्या में 5 एकड़ वैकल्पिक भूमि मस्जिद निर्माण के लिए उपलब्ध कराने का आदेश दिया.
यह भी पढ़े: चूहा कांड के बाद कैट वॅाक! एमवाय के ओपीडी में बिल्ली, इंदौर के वायरल वीडियो ने मचाया बवाल
-भारत एक्सप्रेस
Written By: Shubhra Rai (Intern)
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

