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सुप्रीम कोर्ट से प्रभाकर राव को झटका, कल तक सरेंडर करने का आदेश; जांच के लिए पुलिस हिरासत में पूछताछ की मिली अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना फोन टैपिंग मामले में पूर्व SIB प्रमुख टी. प्रभाकर राव को 12 दिसंबर को सरेंडर करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि पूछताछ कानून के अनुसार होगी.

सुप्रीम कोर्ट से तेलंगाना फोन टैपिंग मामले में तेलंगाना के पूर्व विशेष खुफिया ब्यूरो प्रमुख टी. प्रभाकर राव को झटका लगा है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन की पीठ ने राव को 12 दिसंबर को 11 बजे पुलिस के सामने सरेंडर करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि राव से पुलिस हिरासत में कानून के अनुसार ही पूछताछ की जाएगी. कोर्ट ने राव को घर का खाना और नियमित रूप से दवा लेने की अनुमति दे दी है. इससे पहले हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि अग्रिम जमानत के दौरान राव ने इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को नष्ट किया है.

एससी मेहता ने जांच में सहयोग नही करने का भी आरोप लगाया था. इसका विरोध करते हुए टी. प्रभाकर राव के वकील कहा था कि यह रूटीन प्रक्रिया है. उन्होंने कहा था कि जो भी एक्सेस या डिलीट किया गया होगा, उसका रिकॉर्ड होगा. मैंने कुछ नही डिलीट किया. किसी भी इसकी जांच कराई जा सकती है. उन्होंने कोर्ट को बताया था कि राव जांच में लगातार सहयोग कर रहे है. उन्होंने कहा था कि मुझे 11 बार बुलाया गया 18 घंटे पूछताछ हुई, जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी है. इससे साबित होता है कि मैंने सहयोग किया है.

फोन टैपिंग केस में SC ने प्रभाकर राव को किया तलब

कोर्ट ने फोन टैपिंग मामले में तेलंगाना के पूर्व विशेष खुफिया ब्यूरो प्रमुख टी. प्रभाकर राव को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था और कहा था उनका पासपोर्ट उन्हें उपलब्ध कराया जाए. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पासपोर्ट जारी होने के तीन दिन के भीतर भारत लौटने को कहा था. फोन टैपिंग मामले में मुख्य आरोपी राव ने तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

बता दें कि हैदराबाद के निचली अदालत ने 22 मई को राव के खिलाफ एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था. आदेश में कहा गया था कि यदि राव 20 जून तक अदालत में पेश नही होते हैं तो उन्हें भगोड़ा घोषित किया जा सकता है. एसआईबी के निलंबित डीएसपी समेत चार पुलिस अधिकारियों को हैदराबाद पुलिस ने मार्च 2024 में गिरफ्तार किया था. इन पर विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से खुफिया जानकारी मिटाने और पिछली बीआरएस सरकार के दौरान फोन टैपिंग का आरोप है.

बाद में इन्हें जमानत मिल गई थी. पुलिस के अनुसार आरोपी एक षडयंत्र का हिस्सा थे, जिसमें उन्होंने एसआईबी की संसाधनों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग किया.

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-भारत एक्सप्रेस



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