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प्रयागराज की चर्च की जमीन पर 90 साल की लीज को चुनौती, यथास्थिति बनाए रखने का आदेश

Prayagraj Church Land Dispute: चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन प्रयागराज की याचिका पर विवादित भूमि की यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है.

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प्रयागराज की चर्च की जमीन पर 90 साल की लीज को चुनौती

Prayagraj Church Land Dispute: चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन प्रयागराज की याचिका पर विवादित भूमि की यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है.

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ए.डी. सॉन्डर्स ने अदालत को बताया कि प्रयागराज स्थित प्लॉट संख्या 423, जिसका क्षेत्रफल 0.573 हेक्टेयर (लगभग 1230 वर्ग मीटर) है, पर राज्य सरकार ने मंडलीय मुख्यालय के एकीकृत भवन निर्माण के लिए 90 वर्ष की लीज स्वीकृत की है. याचिकाकर्ता का कहना है कि यह कार्रवाई अनुचित है क्योंकि यही जमीन पहले से ही एक पुरानी लीज के अधीन है.

अधिवक्ता के अनुसार, इलाहाबाद के कलेक्टर ने 30 मार्च 1905 को यह जमीन अमेरिका के प्रेस्बिटेरियन चर्च को स्थायी रूप से लीज पर दी थी. बाद में यह संस्था ‘कमीशन ऑन इक्यूमेनिकल मिशन एंड रिलेशंस ऑफ द यूनाइटेड प्रेस्बिटेरियन चर्च’ में परिवर्तित हो गई.

मूल लीज डीड पूरी तरह से खाती है मेल

याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत को बताया कि भारत में विभिन्न चर्चों की संपत्तियों की देखरेख कर रही संस्थाओं का विलय कर 29 नवंबर 1970 को ‘चर्चेज ऑफ नॉर्थ इंडिया’ का गठन किया गया. इसके बाद 3 मई 1982 को नए ट्रस्टियों की नियुक्ति और संपत्ति हस्तांतरण के दस्तावेज़ों के जरिये चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के साथ एक ट्रस्ट बनाया गया, जिसे प्रबंधन और प्रशासन की जिम्मेदारी सौंपी गई. याचिकाकर्ता का दावा है कि ट्रस्ट डीड में दर्ज सीमाएं मूल लीज डीड की चतुःसीमाओं से पूरी तरह मेल खाती हैं.

जमीन वैध लीज पर तो नई लीज कैसे हो सकती है जारी

इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि जब जमीन पहले से ही वैध लीज के अधीन है, तो राज्य सरकार अपनी किसी एजेंसी या प्राधिकरण के पक्ष में नई लीज जारी करके वहां निर्माण कार्य नहीं करवा सकती.

अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई तक मामले में निर्देश प्राप्त करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी.

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अदालत ने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि अगले आदेश तक विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखी जाए और किसी भी पक्ष को उस भूमि पर तीसरे पक्ष का कोई अधिकार सृजित करने से रोका गया है.

-भारत एक्सप्रेस



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