Rajasthan High Court
पूजा जोशी, जयपुर
राजस्थान में पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के फैसलों को बदलने में जुटी भजनलाल सरकार को जयपुर हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट ने उत्तराखंड समाज को रियायती दर पर आवंटित जमीन को निरस्त करने के राज्य सरकार और राजस्थान हाउसिंग बोर्ड के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है.
जस्टिस शुभा मेहता की अदालत ने उत्तराखंड समाज समिति की याचिका पर सुनवाई करते हुए निरस्तीकरण आदेश पर रोक लगाई और मामले में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए. इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार और राजस्थान हाउसिंग बोर्ड से चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है.
‘बिना सुनवाई और बिना कारण बताए रद्द किया आवंटन’
याचिकाकर्ता समिति की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता लवेश मामनानी ने अदालत में दलील दी कि आवंटन निरस्त करने से पहले समिति को न तो पक्ष रखने या सुनवाई का कोई मौका दिया गया और न ही आवंटन रद्द करने का कोई कारण बताया गया. इस पर अदालत ने सरकार के आदेश पर रोक लगाते हुए यह भी निर्देश दिया कि आवंटित भूमि पर फिलहाल किसी तीसरे पक्षकार (Third Party) का हित सृजित न किया जाए.
समिति ने कोर्ट को बताया कि गहलोत सरकार के कार्यकाल में प्रताप नगर आवासीय योजना सेक्टर-28 में सांस्कृतिक, सामाजिक व पर्यावरण संरक्षण कार्यों के लिए 953 वर्गमीटर जमीन आवंटित की गई थी, जिसकी तय 2% राशि 6 अक्टूबर 2023 को जमा कराई जा चुकी थी.
रिव्यू कमेटी की सिफारिश पर हुई थी कार्रवाई
राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के बाद भजनलाल सरकार ने गहलोत सरकार के अंतिम 6 महीनों के निर्णयों की समीक्षा के लिए मंत्रिमंडलीय एम्पावर्ड समिति बनाई थी. इस समिति की सिफारिश पर ही हाउसिंग बोर्ड ने 21 अप्रैल 2026 को आवंटन निरस्त करने का नोटिस जारी किया था.
गौरतलब है कि केवल उत्तराखंड समाज ही नहीं, बल्कि इस समीक्षा समिति की सिफारिश पर हाउसिंग बोर्ड ने ‘श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान’ (2000 वर्गमीटर) और ‘अग्रवाल समाज सेवा समिति’ (1500 वर्गमीटर) को प्रताप नगर में रियायती दर पर आवंटित जमीनों के आवंटन भी निरस्त कर दिए थे. हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब अन्य प्रभावित संस्थाओं को भी कानूनी राहत मिलने की उम्मीद जगी है.
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