भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) अधिनियम 1999 की धारा 15 के तहत श्री दर्शन किरीटभाई शाह से जुड़े मामले में समझौता आदेश जारी किया है. जिसके परिणाम स्वरूप कंपनी के खिलाफ फेमा 1999 के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए चल रही कार्यवाही समाप्त हो गई है. ये आदेश प्रवर्तन निदेशालय द्वारा ‘अनापत्ति’ जारी किए जाने के बाद आरबीआई द्वारा पारित किया गया है.
FCTRS फॉर्म दाखिल करने में की देरी
इस मामले में प्राप्त विश्वसनीय जानकारी के आधार पर ईडी ने फेमा के प्रावधानों के तहत जांच शुरू की. जांच पूरी होने के बाद, ईडी ने फेमा की धारा 16 के तहत न्यायनिर्णय प्राधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई. जिसमें बताया गया की कंपनी ने फेमा नियमों के तहत FCTRS फॉर्म दाखिल करने में देरी की थी. यह उल्लंघन 24000 रुपये के लेन देन से संबंधित था.
समझौते के लिए सहमति
बता दें कि बाद में कंपनी ने फेमा की धारा 15 के तहत उक्त उल्लंघन के समझौता के लिए आरबीआई के समक्ष आवेदन किया. आरबीआई के संदर्भ पर ईडी ने अधिनियम की भवना के अनुरूप समझौता के लिए सहमति दे दी. इसके बाद ईडी द्वारा जारी की गई अनापत्ति के आधार पर, आरबीआई ने दिनांक 30 जनवरी 2026 के समझौते के आदेश द्वारा उक्त उल्लंघनों को 8470 रुपये के एकमुश्त भुगतान के साथ निपटा दिया है.
इसके बाद उपरोक्त उल्लंघन के.संबंध में कंपनी के विरुद्ध फेमा के प्रावधानों के तहत न्यायिक कार्यवाही और आगे की कानूनी कार्यवाही समाप्त हो गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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