Bharat Express DD Free Dish

गैस बंटवारे पर SC सख्त: केंद्र सरकार से मांगी केजी बेसिन मामले की नई स्टेटस रिपोर्ट

Supreme Court: रिलायंस केजी बेसिन गैस आवंटन मामले पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई की. याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने 2015 के बाद की प्रगति पर केंद्र से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का अनुरोध किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह की रिहाई याचिका मामले में सुनवाई 3 सप्ताह के लिए टाली.

सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह की रिहाई याचिका मामले में सुनवाई 3 सप्ताह के लिए टाली. (PC: भारत एक्सप्रेस)

Edited by Shubhra Rai

Supreme Court: रिलायंस इंडस्ट्रीज के केजी बेसिन से निकलने वाली गैस की कीमत और उसके बंटवारे से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि मामला बेहद महत्वपूर्ण है और इसमें लाखों करोड़ रुपए का सवाल जुड़ा हुआ है.

मामला लाखों करोड़ रुपए से जुड़ा हुआ

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच मामले में सुनवाई कर रही है. मामले की सुनवाई के दौरान वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया कि मामले में आखिरी आदेश साल 2015 में आया था. इसके बाद से मामला नियमित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया. भूषण ने कोर्ट को यह बताया कि मामला केजी गैस बेसिन और गैस फील्ड से जुड़े भारी-भरकम राजस्व और गैस के बंटवारे का है. उन्होंने कहा कि इस मामले में अलग-अलग सरकारों की मंजूरियां शामिल रहीं है और इससे लाखों करोड़ रुपए का आर्थिक हित जुड़ा हुआ है.

पता लगाया जा सके कि मामले में क्या प्रगति हुई

उन्होंने कहा कि गैस से जुड़ा कॉन्ट्रैक्ट पिछली सरकार के कार्यकाल मे साइन हुआ था और उस समय उसे मंजूरी दी गई थी. इसके बाद भी इस व्यवस्था को मंजूरी मिलती रही है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि 2015 के बाद इस मामले में सरकार और संबंधित पक्षों की ओर से क्या कदम उठाए गए. याचिककर्ताओ की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले केंद्र सरकार से एक अपडेटेड स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था, ताकि अदालत को बताया जा सके कि आखिरी आदेश के बाद मामले में क्या प्रगति हुई.

केंद्र सरकार खुद कदम उठाएगी

हालांकि लंबे समय से न तो मामले की सुनवाई हुई और न ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकी भूषण ने कोर्ट से अनुरोध किया कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह मामले में अब तक हुई प्रगति और मौजूदा स्थिति को लेकर एक नई और स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करे. इसपर अटॉर्नी जनरल ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार खुद इस संबंध में जरूरी कदम उठाएगी और अपडेटेड स्थिति से अवगत कराएगी. सुप्रीम कोर्ट ने हालही में केंद्र सरकार के उन आरोपों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था उन्होंने ओएनजीसी के क्षेत्र से गैस नहीं चुराई, बल्कि प्राकृतिक दबाव के कारण गैस का प्रवाह उनके ब्लॉक में हुआ था.

यह भी पढ़ें-Judicial Exams:  सुप्रीम कोर्ट से अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, 3 साल की प्रैक्टिस नियम में मिली छूट

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read