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Judicial Exams:  सुप्रीम कोर्ट से अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, 3 साल की प्रैक्टिस नियम में मिली छूट

Civil Judge Eligibility: निचली अदालतों में सिविल जजों की नियुक्ति को लेकर दिए गए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने मामूली संशोधन कर दिया है. दायर पुनर्विचार याचिका पर विचार करते हुए कोर्ट ने न्यायिक सेवा के लिए तय 3 साल की प्रैक्टिस को घटाकर 1 साल कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर हिंसा जांच कमेटी के पुनर्गठन की याचिका खारिज करते हुए दिल्ली पुलिस को 14 वर्षीय गवाह को सुरक्षा देने और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया.
Edited by Shubhra Rai

Civil Judge Eligibility: निचली अदालतों में सिविल जजों की नियुक्ति को लेकर दिए गए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने मामूली संशोधन कर दिया है. दायर पुनर्विचार याचिका पर विचार करते हुए कोर्ट ने न्यायिक सेवा के लिए तय 3 साल की प्रैक्टिस को घटाकर 1 साल कर दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चुने गए उम्मीदवारों को 1 साल की ट्रेनिंग और 1 साल की ट्रेनिंग और 1 साल की क्लार्कशीप करनी होगी. लेकिन कोर्ट ने न्यायिक सेवा में आने से पहले कानूनी प्रैक्टिस की अनिवार्यता वाले फैसले की समीक्षा करने से इनकार कर दिया है.

सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्ट जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया है. कोर्ट के आदेश के अनुसार चुने गए उम्मीदवारों को न्यायिक अकादमी में ट्रेनिंग लेनी होगी और उसके बाद एक साल की क्लार्कशीप करनी होगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 25 मई 2025 से31 मार्च 2027 के बीच न्यायिक परीक्षा की सूचनाओं में शामिल उम्मीदवार पिछले अनुभव की परवाह किए बिना पात्र होंगे. हालांकि चुने जाने पर ऐसे उम्मीदवारों को केवल एक साल के लिए ट्रेनी न्यायिक अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया जाएगा. उन्हें एक साल की तय क्लार्कशीप भी पूरी करनी होगी.

तीन साल की कानूनी प्रैक्टिस अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना किसी ट्रांजिशनल इंतजाम के तीन साल की प्रैक्टिस के नियम को अचानक फिर से लागू करने से युवा वकीलों और लॉ ग्रेजुएट को परेशान हुई है, इसलिए इसमें थोड़ा दखल जरूरी है. साथ ही 1 अप्रैल 2027 के बाद होने वाली परीक्षाओं के उम्मीदवारों के लिए यही व्यवस्था लागू रहेगी. कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के तौर पर सीधी भर्ती से ज्यूडिशियल सर्विस में आने वाले उम्मीदवारों के लिए तीन साल की कानूनी प्रैक्टिस अनिवार्य कर दी गई थी. यह पुनर्विचार याचिका चंद्रशेखर यादव की ओर से दायर की गई थी.

बता दें कि सभी हाई कोर्ट को नियमों में संशोधन करने को कहा था, ताकि सिविल जज सीनियर डिवीजन के लिए विभागीय परीक्षा के जरिए 10 फीसदी पद्दोन्नति को बढ़ाकर 25 फीसदी किया जाए. इसके अलावे सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज जूनियर डिवीजन परीक्षा में बैठने के लिए तीन साल की नियुन्तम प्रैक्टिस की आवश्यकता को बहाल कर दिया था.

कोर्ट ने कहा था कि,

राज्य सरकारें सिविल जज सीनियर डिवीजन के लिए सेवा नियमों में संशोधन करके इसे 25 फीसदी तक बढ़ाएगी. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सभी राज्य सरकारें नियमों में संशोधन करके यह सुनिश्चित करेगी कि सिविल जज जूनियर डिवीजन के लिए परीक्षा में शामिल होने वाले किसी भी उम्मीदवार के पास कम से कम तीन साल की प्रैक्टिस का अनुभव होना चाहिए.

इसे बार मे 10 साल का अनुभव रखने वाले वकील द्वारा प्रमाणिक किया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा था कि तीन साल की अवधि को नामांकन की तारीख से माना जा सकता है. ये शर्ते उन परीक्षाओं पर लागू नहीं होगी, जिनकी प्रक्रिया हाईकोर्ट्स ने शुरू कर दी थी. फिलहाल इन परीक्षाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवारों पर सुप्रीम कोर्ट का यह नियम लागू नही होगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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