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रिलायंस टेलीकॉम के पूर्व डायरेक्टर गौतम बी. दोशी की न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ी; राऊज एवेन्यू कोर्ट का आदेश

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने ₹114.98 करोड़ रुपये के एसबीआई (SBI) लोन धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के पूर्व निदेशक गौतम बी. दोशी की न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए बढ़ा दी है.

Rouse Avenue Court

Rouse Avenue Court

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (विदेशी मुद्रा शोधन) के मामले में आरोपी रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के पूर्व डायरेक्टर गौतम बी. दोशी की न्यायिक हिरासत की अवधि को 14 दिन के लिए बढ़ा दिया है. दोशी को न्यायिक हिरासत की अवधि खत्म होने के बाद राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया था, जिसके बाद कोर्ट ने उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि को बढ़ाने का निर्णय लिया.

बचाव पक्ष ने किया विरोध

मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से पेश वकील ने कोर्ट में विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि दोशी जांच में पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 50 के तहत उनका बयान पहले ही दर्ज हो चुका है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी कोर्ट को अवगत कराया था कि 74 वर्षीय दोशी कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, इसलिए उन्हें ईडी की हिरासत में नहीं भेजा जाना चाहिए.

ED ने शुरू की मनी लॉन्ड्रिंग की जांच

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मार्च में सतीश सेठ और गौतम बी. दोशी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. सीबीआई की टीम ने इस जांच के हिस्से के रूप में दोनों अधिकारियों के परिसरों और ठिकानों पर छापेमारी भी की थी. सीबीआई की इसी शिकायत को मुख्य आधार बनाकर ईडी ने दोनों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपनी जांच शुरू की है. यह पूरी कार्रवाई भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में कथित ₹114.98 करोड़ रुपये के ऋण (लोन) धोखाधड़ी मामले की जांच के तहत की गई थी.

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₹735 करोड़ का था कुल कर्ज

सीबीआई ने बताया था कि एसबीआई उन 11 बैंकों के समूह (कंसोर्टियम) का हिस्सा था, जिन्होंने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को कुल ₹735 करोड़ रुपये का कर्ज देने की मंजूरी दी थी. सीबीआई ने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड, पूर्व डायरेक्टर सतीश सेठ, पूर्व डायरेक्टर गौतम बी. दोशी, कुछ सरकारी कर्मचारियों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ साजिश रचने, आईपीसी (IPC) की विभिन्न धाराओं (जिनमें धोखाधड़ी शामिल है) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत आपराधिक कदाचार व आधिकारिक पद के दुरुपयोग के अपराधों के लिए मामला दर्ज किया था. माना जा रहा है कि ईडी ने सीबीआई की इसी शिकायत का संज्ञान लेकर बैंक लोन धोखाधड़ी के इस बड़े मामले में सेठ और दोशी की भूमिका की जांच तेज कर दी है.



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