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अकासा एयरलाइन को साकेत कोर्ट का झटका, ट्रैवल एजेंट को 1.08 करोड़ देने का आदेश

साकेत कोर्ट ने अकासा एयरलाइन (Akasa Air) को कंफर्म ग्रुप बुकिंग रद्द करने पर बड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने इसे कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन मानते हुए एयरलाइन को ट्रैवल एजेंट को 1.08 करोड़ रुपए देने का आदेश दिया है.

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साकेत कोर्ट से अकासा एयरलाइन को झटका लगा है. कोर्ट ने अकासा एयर लाइन को ट्रेबल एजेंट को 1.08 करोड़ रुपए देने का आदेश दिया है. जिला जज (कमर्शियल) ललित कुमार ने अपने फैसले में कहा है कि पीक त्योहारी सीजन के लिए की गई 640 सीटों की कंफर्म ग्रुप बुकिंग रद्द करना कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन था. कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रैवल इंडस्ट्री में त्योहारों के समय ग्रुप बुकिंग पहले से इसलिए कि जाती है, ताकि अनुमानित मांग का लाभ उठाया जा सके. ऐसे में कंफर्म ग्रुप बुकिंग रद्द करना व्यावसायिक अवसर छीनने के समान है.

बता दें कि एबीएस टूर्स एंड ट्रेवल्स ने अप्रैल 2023 में दिल्ली-गोवा और गोवा-दिल्ली के लिए 23 दिसंबर 2023 से 13 जनवरी 2024 के बीच यात्रा के लिए 640 सीटें बुक किया था. जिसका कुल किराया का 25 फीसदी यानी 4,82,640 एडवांस के रूप में जमा किया गया था. एडवांस पैसा भुगतान के बाद पीएनआर जनरेट हो गए थे. लेकिन मई 2023 में एयरलाइन ने बुकिंग को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि 70 से अधिक सीटों की बुकिंग के लिए 50 फीसदी पैसा एडवांस देना जरूरी था.

एयरलाइन रही विफल

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि एयरलाइन यह साबित करने में विफल रहा है 50 फीसदी एडवांस की शर्त बुकिंग के समय लागू थी या नहीं यह एजेंट को नहीं बताई गई थी. कोर्ट ने कहा कि 25 फीसदी भुगतान स्वीकार करने और पीएनआर जारी करने के बाद भारतीय अनुबंध अधिनियम 1872 के तहत बाध्यकारी अनुबंध बन चुका था. कोर्ट ने माना कि एक तरफा रद्द करना अनुबंध का उल्लंघन था.

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ट्रेवल एजेंट की मांग खारिज

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि एडवांस की वापसी केवल मूल राशि को न्यूटल करती है. यह उस लाभ की भरपाई नहीं करती जो टिकट रद्द करने के कारण खो गया. हालांकि कोर्ट ने ट्रेवल एजेंट की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें 18 फीसदी ब्याज के साथ मुआवजे देने के आदेश देने की मांग की गई थी. इतना ही नही याचिकाकर्ता ने मानसिक उत्पीड़न के लिए भी हर्जाने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि यह विवाद दो व्यावसायिक संस्थाओं के बीच का है, इसलिए मानसिक कष्ट का दावा करना उचित नही है.



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