Bharat Express DD Free Dish

सुप्रीम कोर्ट ने संजीव भट्ट को ड्रग्स मामले में राहत देने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने 20 साल की सजा काट रहे पूर्व आईपीएस संजीव भट्ट को राहत देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है.

Edited by Radha Priya

सुप्रीम कोर्ट ने 1996 के ड्रग्स प्लांटिंग मामले में सजा काट रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को राहत देने से इनकार कर दिया है. जस्टिस जे के महेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने संजीव भट्ट की 20 साल की सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया है.

कोर्ट ने संजीव भट्ट को राहत देने से इनकार किया

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं है. मामले की सुनवाई के दौरान संजीव भट्ट की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि भट्ट 7 साल 3 महीने की सजा काट चुके है, इसलिए उनकी सजा निलंबित होनी चाहिए, लेकिन बेंच ने कहा कि वह इस मामले में दखल देने के पक्ष में नही है.

सिब्बल ने दलील देते हुए कहा कि आरोपी 5 किलों ड्रग्स का था, लेकिन कोर्ट ने उन्हें 1.015 किलो अफीम के कब्जे में पाया है, जो कमर्शियल क्वांटिटी नही है. इसपर जस्टिस जे के महेश्वरी ने कहा कि रिकॉर्ड में आरोप काफी गंभीर है. इसलिए राहत नही दी जा सकती.

गुजरात हाईकोर्ट ने संजीव भट्ट की जमानत याचिका खारिज की

संजीव भट्ट ने इससे पहले सजा पर रोक लगाने और जमानत की मांग को लेकर याचिका दायर की थी, जिसे हाई कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि “अपराध की गंभीरता, एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के कठोर प्रावधान, दोषसिद्धि के बाद निर्दोष मानने के सिद्धांत का उलट जाना, सामाजिक प्रभाव और आरोपी की पृष्ठभूमि को.देखते हुए सजा निलंबन या जमानत पर विचार नही किया जा सकता”.

बता दें कि गुजरात हाई कोर्ट के निर्देश के बाद सीआईडी ने भट्ट को 2018 में गिरफ्तार किया था. भट्ट पर आरोप है कि 1996 में बनासकांठा पुलिस ने राजस्थान के वकील सुमेर सिंह राजपुरोहित पर 1.5 किलो अफीम रखने का झूठा केस लगाया था और उन्हें पलनपुर के एक होटल में फंसाया गया था.

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read