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सुप्रीम कोर्ट ने सारंडा वन क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने पर झारखंड सरकार को दी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने सारंडा वन क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने के मामले में झारखंड सरकार को फिलहाल राहत दी है. कोर्ट ने 31,468.25 हेक्टेयर क्षेत्र को वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी घोषित करने के लिए एक सप्ताह में अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट से सारंडा वन क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने के मामले में झारखंड सरकार को फिलहाल राहत मिल गई है. कोर्ट ने 31468.25 हेक्टेयर को सेंक्चुरी घोषित करने के लिए एक सप्ताह में अधिसूचना जारी करने के लिए कहा है. सीजेआई बी आर गवई और विनोद चंद्रन की पीठ मामले में सुनवाई कर रही हैं. कोर्ट ने हेमंत सरकार को एक सप्ताह के अंदर शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. वही कोर्ट ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड और वैध खनन कार्यों को सेंक्चुरी के प्रभाव क्षेत्र से बाहर रखने का आदेश दिया है.

कोर्ट एक सप्ताह बाद मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया सहित अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है. सेल की ओर से दायर याचिका में सेंक्चुरी घोषित करने के मामले में पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया है. मामले की सुनवाई के दौरान सेल की ओर से पेश वकील ने दलील देते हुए कहा कि सारंडा के खदान से उसके लौह अयस्क की जरूरतों का 50 फीसदी पूरा होता है. वह सरकारी कंपनी है. उन्होंने कहा कि निजी खदान मालिकों से आयरन (Ore) ही खरीदती है. उन्होंने यह भी कहा कि 57 हजार हेक्टेयर को सेंक्चुरी घोषित करने से उनकी जरूरत पूरी नही होगी और ना ही उत्पादन का लक्ष्य पूरा होगा.

क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने पर उठा सवाल

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सारंडा को अभ्यारण्य घोषित न करने को अवमानना माना था और कहा था कि यदि आठ अक्टूबर तक अभ्यारण्य घोषित नहीं किया गया तो मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू होगी. पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने कोर्ट को सूचित किया था कि उसने प्रस्तावित अभ्यारण्य क्षेत्र को पहले के 31468.25 हेक्टेयर से बढ़ाकर 57510.41 हेक्टेयर कर दिया गया है और अतिरिक्त 13603.806 हेक्टेयर क्षेत्र को सासंगदाबुरू संरक्षण रिजर्व के रूप में अधिसूचित करने के लिए चिन्हित किया है. अदालत ने कहा कि प्रस्ताव पहले ही विशेषज्ञ टिप्पणियों के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून भेज दिया है.

बता दें कि कोर्ट ने आदेश के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने हाल ही में सारंडा का दौरा किया था, जहां उन्होंने स्थानीय लोगों की स्थिति का मूल्यांकन किया. इस ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट का उल्लेख किया हैं कि सारंडा को वाइल्ड लाइफ सेंचुरी घोषित करने से वहां के गरीब आदिवासियों के जीवन में नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. बता दें कि सारंडा अभ्यारण्य के संबंध में वर्ष 2022 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अभ्यारण्य घोषित करने का आदेश दिया था.

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-भारत एक्सप्रेस



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